तस्करों के गोदामों से बरामद हुईं नशे की दवाइयां
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नशे की दवाइयों को आगरा से काजू और बादाम के डिब्बों में छिपाकर भेजा जाता था। पैकिंग ऐसे कार्टन में की जाती थी जिन पर काजू, बादाम और अन्य मेवों के चित्र होते थे। पंजाब के लिए सबसे हाई डोज की दवाइयां होती थीं, ये तस्कर पंकज गुप्ता के घर पर तैयार होती थीं। दिल्ली, राजस्थान, हरिायणा और अन्य राज्यों के लिए कम डोज की दवा भेजी जाती थी। यह खुलासा गिरफ्तार तस्करों से पूछताछ में हुआ है।
तस्करों ने यह भी बताया है कि नशे की दवाइयां राजस्थान और हरियाणा में आटे और दाल की बोरियां के बीच में भरकर भेजी जाती थीं। ऐसा इसलिए किया जाता था कि इन राज्यों में दवाएं आटे और दाल के नाम पर पंजीकृत फर्जी फर्मों के लिए भेजा जाता था। पंजाब के लिए फर्जी फर्म से ई-वे बिल तैयार कराए जाते थे। जीएसटी विभाग की जांच में तीन फर्जी फर्म का पता चल चुका है।
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शातिर: ऑन डिमांड नशा भेजता था पंकज
औषधि निरीक्षक नरेश मोहन दीपक ने बताया कि पंकज गुप्ता ऑन डिमांड नशे की दवाएं तैयार करता था। हैवी डोज की दवाओं की सबसे ज्यादा मांग पंजाब में होने के कारण हर सप्ताह सप्लाई की जाती थी। इसमें नशे की दवाओं की 500 ग्राम से एक किलो की थैली बनाकर फल और ड्राई फ्रूट के डिब्बों में पैक की जाती थी।