श्री पारस अस्पताल प्रकरण: डॉ. शरद गुप्ता
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श्री पारस अस्पताल में दमघोंटू मॉकड्रिल मामले में हकीकत जानने के लिए गठित की गई इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की पांच सदस्यीय कमेटी के सदस्य पूर्व अध्यक्ष डॉ. शरद गुप्ता ने इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कमेटी की सत्यनिष्ठा और जांच रिपोर्ट पर उठ रहे सवालों से आहत होकर कमेटी के चेयरमैन और आईएमए अध्यक्ष को इस्तीफा भेज दिया। डॉ. शरद गुप्ता के जांच कमेटी से अलग होने की जानकारी होते ही आईएमए में हड़कंप मच गया। एसोसिएशन के चिकित्सक दो हिस्सों में बंट गए हैं।
डॉ. शरद गुप्ता ने अध्यक्ष को सौंपे अपने इस्तीफे में कहा है कि आईएमए की साख पर दाग लग रहा है। जांच कमेटी की ईमानदारी, निष्ठा पर जिस तरह से सवाल उठाए जा रहे हैं, उससे वह शर्मिंदगी महसूस कर रहे हैं। चिकित्सक समुदाय की साख पर भी यह काला धब्बा है। ऐसे माहौल में उनके लिए कमेटी के सदस्य के रूप में जांच करना और हिस्सा बने रहना मुश्किल है। इसलिए उनका इस्तीफा स्वीकार किया जाए।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष रहे और एनजीटी में कई मामलों में पर्यावरण की याचिकाएं दायर करने वाले डॉ. शरद गुप्ता के इस्तीफे के बाद पूरे चिकित्सा जगत में हड़कंप मच गया है। सोशल मीडिया पर कई चिकित्सक मुखर हुए मामले में ईमानदारी से जांच कर आईएमए की साख बचाने की अपील करते नजर आए।
एसोसिएशन की साख बचाने पर जोर
श्री पारस अस्पताल मामले में जांच के लिए आईएमए ने पांच सदस्यीय जांच कमेटी बनाई थी। इसमें आईएमए के पूर्व अध्यक्ष, डॉ. सुधीर धाकरे, डॉ. डीवी शर्मा, डॉ. मुनीश्वर गुप्ता, डॉ. शरद गुप्ता और डॉ. संजय चतुर्वेदी शामिल किए गए थे। इस कमेटी ने आरोपी चिकित्सक के बयान दर्ज किए और उनसे वायरल हुए वीडियो के बारे में प्रश्न भी पूछे। इस बीच सोशल मीडिया और संचार माध्यमों में कमेटी द्वारा चिकित्सक को क्लीन चिट देने की तैयारी की खबरें दौड़ती रहीं। कमेटी के दो चिकित्सकों की भूमिका पर गठन के समय ही सवाल उठाए गए थे। इस मुद्दे पर आईएमए का ही एक धड़ा एसोसिएशन की साख बचाने पर जोर दे रहा है।
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