डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय स्टार्टअप शुरू करने में उन लोगों की मदद करेगा, जिनके पास नए आइडिया हैं पर उन्हें शुरू करने के लिए संसाधन नहीं हैं। विश्वविद्यालय ने विवेकानंद इन्क्यूबेशन फाउंडेशन नाम से कंपनी बनाई है। यह स्टार्टअप शुरू करने के इच्छुक लोगों को बैठने के लिए केबिन, कुर्सी और सोफा उपलब्ध कराएगा। साथ ही फर्म का पंजीकरण भी कराएगा।
आईईटी के निदेशक और विवेकानंद इन्क्यूबेशन फाउंडेशन के निदेशक प्रो. वीके सारस्वत ने बताया कि इन्क्यूबेशन सेंटर का संचालन खंदारी परिसर स्थित शिवाजी मंडपम में किया जाएगा। फर्नीचर का ऑर्डर दिया गया है, 10 से 12 दिन में बिड खुल जाएगी। फर्नीचर आने के साथ काम शुरू हो जाएगा। यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन लिमिटेड की ओर से इन्क्यूबेशन सेंटर को पांच वर्ष के लिए 1.5 करोड़ रुपये का अनुदान स्वीकृत कर दिया गया है।
इन्क्यूबेशन सेंटर में एक प्रोजेक्ट मैनेजर और दो सपोर्टिंग स्टाफ रखा जाएगा। नए आइडिया लाने वाले लोग स्टार्टअप शुरू कर सकें और अपना कारोबार चला सकें, इसमें मदद की जाएगी। स्टार्टअप शुरू करने के लिए आइडिया लाने वालों को प्रशिक्षित किया जाएगा। विवेकानंद इन्क्यूबेशन सेंटर की ओर से ही स्टार्टअप शुरू करने वाले व्यक्ति की फर्म का पंजीकरण कराया जाएगा। स्टार्टअप के लिए विश्वविद्यालय की कंपनी सीड मनी और लैब की सुविधा भी उपलब्ध कराएगी।
प्रभारी कुलपति फर्म के चेयरमैन हैं
विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति प्रो. विनय पाठक विवेकानंद इन्क्यूबेशन फाउंडेशन कंपनी के चेयरमैन, प्रो. अजय तनेजा और प्रो. वीके सारस्वत निदेशक हैं। इन्क्यूबेशन सेंटर के लिए स्वीकृत अनुदान इसी कंपनी के खाते में आएगा।
प्रति वर्ष कम से कम दस स्टार्टअप कराना होगा
विवेकानंद इन्क्यूबेशन फाउंडेशन को प्रति वर्ष कम से कम दस स्टार्टअप कराने होंगे। कंपनी जिन फर्मों का पंजीकरण कराएगी, उनकी 10 फीसदी इक्विटी अपने पास स्टार्टअप शुरू करने वाले व्यक्ति की सहमति से रख सकेगी। प्रो. वीके सारस्वत ने बताया कि जिन फर्मों को पंजीकरण कराया जाएगा, वह अपने उत्पाद बेचने जाएगी तो उसे अपना अनुभव बताने की जरूरत नहीं होगी।