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विश्वविद्यालय: सत्र परीक्षाएं फरवरी में, अभी बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठकें चल रहीं

Fri, 08 Jan 2021 02:34 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय - फोटो : अमर उजाला
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की ओर से सेमेस्टर परीक्षा वाले पाठ्यक्रमों का पंचांग जारी कर दिया गया है। 15 से 28 फरवरी तक विषम सेमेस्टर परीक्षाएं प्रस्तावित हैं। अभी तक विश्वविद्यालय प्रशासन सभी पाठ्यक्रमों का निर्धारण नहीं कर सका है। सेमेस्टर परीक्षा वाले पाठ्यक्रमों को भी 25 फीसदी कम किया जाना है।
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विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से छह जनवरी को एग्रीकल्चर एक्सटेंशन के पाठ्यक्रम को कम करने के लिए बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक कराई गई। साथ में ललित कला संकाय की बैठक बोर्ड ऑफ स्टडीज की संस्तुतियों को मंजूरी देने के लिए की गई। पाठ्यक्रम जारी करते-करते परीक्षा का समय नजदीक आ जाएगा। मुख्य परीक्षा वाले पाठ्यक्रमों को कम करने की प्रक्रिया 23 नवंबर से शुरू की गई थी, पांच दिसंबर तक यह पूरी होनी थी। अभी तक कला, विज्ञान, वाणिज्य संकाय के किसी विषय के पाठ्यक्रम को कम करके जारी नहीं किया जा सका है।


कुलपति प्रो. अशोक मित्तल का कहना है कि शिक्षकों को पता है कि विभिन्न विषयों के कौन से पाठ्यक्रम महत्वपूर्ण हैं। उसी के अनुरूप पढ़ाई करा रहे हैं। बोर्ड ऑफ स्टडीज के माध्यम से पाठ्यक्रम कम करना औपचारिकता है। जिन पाठ्यक्रमों को कम किया गया है, उनको वेबसाइट पर अपलोड करने की प्रक्रिया चल रही है। बीबीए व बीसीए का पाठ्यक्रम अपलोड किया जा चुका है।
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स्नातक के परिणाम आए नहीं, परास्नातक में प्रवेश के लिए रजिस्ट्रेशन बंद

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने परास्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए वेब रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया बंद कर दी है। जबकि अभी तक सभी स्नातक पाठ्यक्रमों और सभी छात्रों के परिणाम नहीं जारी किए जा सके हैं। छात्र संगठन वेब रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया बंद किए जाने का विरोध कर रहे हैं।


विश्वविद्यालय की ओर से वेब रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया 25 दिसंबर से ही बंद कर दी गई है। जिन कॉलेजों के स्नातक के परीक्षा परिणाम प्रायोगिक परीक्षा के अंक उपलब्ध न होने, फीस जमा न होने, नकल पर निर्णय न लिए जाने व अन्य वजहों से रुके हुए हैं, वे छात्र-छात्राएं परास्नातक में प्रवेश के लिए प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की ओर से बुधवार को कुलपति से वेब रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया खोलने की मांग भी की थी।


भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन के कार्यकर्ता अंकुश गौतम का कहना है कि जब तक स्नातक के परिणाम लंबित हैं, परास्नातक की प्रवेश प्रक्रिया बंद नहीं करनी चाहिए। विश्वविद्यालय व कॉलेजों की गलती का खामियाजा छात्र क्यों भुगतें। वेब रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया फिर से खोलनी चाहिए।
 
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छात्रों के परिणाम लटकने के लिए कॉलेज जिम्मेदार
कुलपति प्रो. अशोक मित्तल का कहना है कि स्नातक के विभिन्न पाठ्यक्रमों के छात्र-छात्राओं के परिणाम लटकाने के लिए कॉलेज जिम्मेदार हैं। प्रायोगिक व मौखिक परीक्षाओं के अंक नहीं दिए जा रहे हैं।


ऐसे में प्रवेश प्रक्रिया बहुत आगे नहीं बढ़ाई जा सकती। प्रवेश समिति के समन्वयक प्रो. मनु प्रताप सिंह का कहना है कि वेब रजिस्ट्रेशन के संबंध में कुलपति का जो भी निर्देश होगा, उसी के अनुरूप कदम उठाया जाएगा। फिलहाल 25 दिसंबर से प्रक्रिया बंद है।
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