डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में अजब गजब मामला सामने आया है। दीवानी के अधिवक्ता की एक दो नहीं, बल्कि चार कॉलेज में नियुक्ति कर दी गई। हैरानी की बात ये है कि अधिवक्ता को इस बारे में जानकारी तक नहीं थी। मामला सामने आने के बाद अधिवक्ता ने राज्यपाल के साथ थाना हरीपर्वत और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के यहां प्रार्थना पत्र दिया।
आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में दयालबाग स्थित मंगलम शिला निवासी अधिवक्ता डॉ. अजीत कुमार सिंह की चार कॉलेजों में नियुक्ति हैं और उन्हें इस बात का पता तक नहीं। साफ शब्दों में समझें तो वे चार कॉलेजों में नौकरी कर रहे हैं। मामला सामने आने के बाद अधिवक्ता ने राज्यपाल के साथ थाना हरीपर्वत और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के यहां प्रार्थना पत्र दिया। जिसमें संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए पांच मई की तारीख नियत की है। कोर्ट ने सीओ हरीपर्वत से भी आख्या तलब की है।
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डॉ. अजीत कुमार सिंह ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था। इसमें कहा कि वह दीवानी में अधिवक्ता हैं। पूर्व में 2004 से 2012 तक डॉ. बीआर आंबेडकर विश्वविद्यालय के विधि विभाग में अनुबंधित प्रवक्ता रहे हैं। इसके बाद एमपी भोज मुक्त विश्वविद्यालय भोपाल में सहायक निदेशक के पद रहे हैं। उन्हें एक साथ चार कॉलेजों में नियुक्त दर्शाकर धन का गबन किया गया। इसकी जानकारी पर उन्होंने थाना हरीपर्वत पुलिस सहित राज्यपाल से शिकायत की। मगर, कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस पर कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया।
इस मामले में कोर्ट ने थाने से आख्या मांगी। इस पर एसआई नीलम राणा ने विश्वविद्यालय से जानकारी मांगी। कुलसचिव ने जानकारी दी कि डॉ. अजीत कुमार सिंह का पूर्व में चार विधि कॉलेजों में साक्षात्कार समिति की संस्तुति के बाद अनुमोदन किया गया था, जिसको विश्वविद्यालय ने 20 जनवरी 2022 को डिग्री कॉलेज से अनुमोदन निरस्त कर दिया है। इसकी सूचना वादी को भी दी जा चुकी है।
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इससे पहले कोर्ट ने एसएसपी से भी जांच कर आख्या मांगी थी। एसएसपी ने सीओ को एक अप्रैल तक आख्या देने के लिए निर्देश दिए। कहा था कि आख्या नहीं देने पर प्रतिकूल टिप्पणी कोर्ट से की जा सकती है। मगर, सीओ ने जांच आख्या नहीं भेजी है। अब पांच मई तक आवश्यक रूप से सीओ से आख्या प्रस्तुत करने के लिए कोर्ट ने रिवाइंडर भेजा है। यह प्रार्थना पत्र डॉ. बीआर आंबेडकर विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति अरविंद दीक्षित सहित छह अन्य के खिलाफ प्रस्तुत किया गया था।