डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने डिग्री देने के लिए ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था बनाई है, लेकिन ऑनलाइन आवेदन करने के बाद भी छात्रों को विश्वविद्यालय की दौड़ लगानी पड़ रही है। इस समय करीब 7.5 हजार डिग्रियां लंबित हैं। वहीं करीब 8.5 हजार आवेदनों में कमियां बताकर इसे रोक लिया गया है।
डिग्री के लिए ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था 19 अप्रैल 2018 में शुरू की गई। योजना यह थी कि आवेदन के बाद निर्धारित समय के अंदर छात्र-छात्राओं को डिग्री भेज दी जाएगी। आवेदन में यदि कोई कमी पाई जाती है तो आवेदक को मैसेज भेजकर उसे दूर करने के लिए जानकारी दी जाएगी।
ट्रैकिंग की भी सुविधा दी जानी थी, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। आवेदन के सात-आठ माह बाद भी छात्र-छात्राओं को डिग्रियां नहीं मिल पाई हैं। सख्ती के बाद भी पटलों पर डिग्रियां लटकाई जा रहीं हैं। प्रिंटिंग विभाग, चार्ट रूम, हेल्प डेस्क पर फाइलें लटकी हुई हैं।
60 फीसदी डिग्रियां भी नहीं दे पाए
ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन को करीब 36,000 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इसमें से 20 हजार के करीब डिग्रियां ही छात्र-छात्राओं के पतों पर डिस्पैच की जा सकी हैं। जिनके आवेदनों में कमियां हैं, उन्हें उन्हें मैसेज भेजकर बताया भी नहीं जा रहा है। विश्वविद्यालय पहुंचने के बाद ही विद्यार्थियों को इसका पता चल रहा है।
एक दिन में 250-300 डिग्री जारी हो रहीं
प्राप्त आवेदनों के आधार पर एक-एक दिन में 250 से 300 डिग्रियां जारी की जा रहीं हैं। एक दिन तो सर्वाधिक 507 डिग्रियों पर हस्ताक्षर किए। लंबित प्रकरण उत्तरोत्तर कम हो रहे हैं।
जिन आवेदनों में कमियां हैं उन्हें भी ठीक कराया जा रहा है। इस समय परीक्षा के साथ अन्य कामों का बोझ बढ़ा है। डीआर और एआर के 13 में से 11 पद रिक्त हैं। -डॉ. राजीव कुमार, प्रभारी कुलसचिव व परीक्षा नियंत्रक, विश्वविद्यालय
नौकरी का संकट खड़ा हो रहा
समय से डिग्री न मिल पाने से छात्र-छात्राओं को नौकरी के लिए आवेदन में परेशानी हो रही है। जो नौकरी कर रहे हैं उनकी नौकरी को खतरा है। विश्वविद्यालय को बिना आवेदन लिए छात्र-छात्राओं के घरों पर डिग्री भेजनी चाहिए। -गौरव शर्मा, पूर्व अध्यक्ष, विवि छात्र संघ