उन्होंने पुलिस को बताया कि उनके बहनोई सेना में कर्नल हैं। वो असम में तैनात हैं। वो भी कासगंज में जमीन तलाश रहे थे। इसलिए उन्होंने बहनोई के लिए बैनामा तय किया। उन्होंने छह लाख रुपये चिंटू के खाते में डाले और एक लाख रुपये का भुगतान बाबर के खाते में कर दिया।
एक साल तक आजकल कहकर यह लोग बैनामा के लिए टालते रहे और अब बैनामा कराने और धनराशि वापस करने से स्पष्ट इंकार कर दिया है। कासगंज कोतवाली पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है।
गृह मंत्रालय के आदेश का दिया हवाला
दर्ज कराए गए मुकदमे में पीड़ित सौरभ यादव ने गृह मंत्रालय के आदेश का हवाला दिया है। जिसमें प्रदेश सरकार की ओर से अफसरों को निर्देशित किया है कि सेना में तैनात जवानों और अफसरों के मामले प्राथमिकता से निपटाएं।
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