डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अशोक मित्तल ने अपना इस्तीफा राजभवन भेजा, जिसे राज्यपाल ने स्वीकार करते हुए पत्र जारी किया है। प्रो. मित्तल वित्तीय अनियमितताओं समेत कई आरोपों के कारण बीते साल जुलाई से कार्य विरत चल रहे थे। राजभवन की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि प्रो. मित्तल ने 11 जनवरी को स्वेच्छा से इस्तीफा दिया है, जिसे स्वीकार किया जाता है। दरअसल, वित्तीय अनियमितताओं, संविदा शिक्षकों की अनियमित नियुक्तियां और कोरोना नियमों के उल्लंघन पर इनको बीते साल पांच जुलाई को कार्य से हटा दिया था। इनके स्थान पर लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आलोक राय को अतिरिक्त प्रभार दिया गया। नई तैनाती होने तक ये प्रभारी बने रहेंगे। प्रो. मित्तल करीब 17 महीने ही कुलपति के तौर पर सेवाएं दे सके। ये 11 फरवरी 2020 को विश्वविद्यालय के कुलपति बनाए गए थे और पांच जुलाई 2021 को इन्हें हटा दिया गया। करीब छह महीने बाद इन्होंने इस्तीफा दे दिया।
पहले कुलपति रहे, जो अपने निर्देशन में नहीं करा पाए दीक्षांत समारोह
विश्वविद्यालय के इतिहास में प्रो. अशोक मित्तल पहले कुलपति रहे, जो अपने निर्देशन में दीक्षांत समारोह नहीं करा पाए। 2019-20 सत्र का दीक्षांत समारोह बीते साल पांच अप्रैल 2021 को प्रस्तावित था। इसी बीच प्रो. मित्तल के संक्रमित होने पर समारोह टाल दिया। पांच जुलाई को वित्तीय अनियमितताओं के चलते इनको कार्य विरत कर दिया। बीते साल 21 दिसंबर को प्रभारी कुलपति प्रो. आलोक राय के निर्देशन में दीक्षांत समारोह हुआ।
भ्रष्टाचार, प्रशासनिक-वित्तीय अनियमितताओं समेत गंभीर शिकायतें
राजभवन को प्रो. अशोक मित्तल पर भ्रष्टाचार, प्रशासनिक-वित्तीय अनियमिताताओं समेत गंभीर शिकायतें प्राप्त हुई थीं। 31 मई से दो जुलाई तक कुलाधिपति की अध्यक्षता में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की समीक्षा में कुलपति विभिन्न बिंदुओं पर संतोषजनक जवाब नीं दे सके, इसके लिए पहले से तैयारियां भी नहीं की थी। इसमें प्रमुख रूप से छात्रों को डिग्रियां समय पर तैयार कर वितरण न करना, कर्मचारियों को अनावश्यक रूप से अतिरिक्त समय का भत्ता देना और संविदा कर्मचारियों की नियुक्तियों के लिए आवश्यक रोस्टर तैयार न करना रहा। राज्यपाल ने इसे अत्यंत गंभीर माना।
तीन सदस्यों की कमेटी कर रही मामले की जांच
कुलपति के खिलाफ तीन सदस्यों की समिति जांच कर रही है। इसमें सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना पंड्या अध्यक्ष हैं। सदस्य के तौर पर छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक, सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु सिद्धार्थ नगर के पूर्व कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे सदस्य हैं। एक महीने में जांच रिपोर्ट देनी थी, लेकिन करीब छह महीने से अधिक समय बीत चुका है।