विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी प्रो. प्रदीप श्रीधर के मुताबिक बैठक में तय किया गया है कि पहली पाली की परीक्षा खत्म होने के बाद दूसरी पाली की परीक्षा शुरू होने के बीच दो घंटे का अंतराल रखा जाएगा।
जिससे विद्यार्थियों को असुविधा न हो और सामाजिक दूरी का पालन भी कराया जा सके। उनका कहना है कि परीक्षा में बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाने का निर्णय संबद्ध महाविद्यालयों के प्राचार्यों और शिक्षक संघ की सहमति से लिया गया है।
ऑनलाइन माध्यम से हुई परीक्षा समिति की बैठक में कुलसचिव डॉ. राजीव कुमार, प्रो. अजय तनेता, प्रो. मनोज श्रीवास्तव, प्रो. पीके सिंह, डॉ. रोशन लाल, डॉ. यशपाल सिंह, डॉ. प्रताप सिंह, औटा के अध्यक्ष डॉ. मुकेश भारद्वाज व महामंत्री डॉ. निशांत चौहान की मौजूदगी रही।
अंतिम वर्ष के छात्रों की परीक्षाएं पहले होंगी
परीक्षा समिति की बैठक में निर्णय लिया गया कि स्नातक और परास्नातक अंतिम वर्ष के छात्र-छात्राओं की परीक्षाएं पहले कराई जाएंगी और इनका परिणाम भी पहले जारी किया जाएगा। विश्वविद्यालय की मुख्य परीक्षा में करीब 3.90 लाख छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं।
विश्वविद्यालय को उठाना पड़ेगा आर्थिक नुकसान
विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से स्थगित परीक्षाएं ओएमआर आधारित कराने पर आर्थिक रूप से नुकसान भी उठाना पड़ेगा। जो प्रश्नपत्र पहले छप चुके थे, अब उनका इस्तेमाल नहीं हो सकेगा। वहीं, विश्वविद्यालय को नए सिरे से प्रश्नपत्र भी बनवाने होंगे।
इसमें शिक्षकों को फिर से लगना होगा। मुख्य परीक्षाएं दो मार्च को शुरू हुईं थीं और 17 मार्च के बाद ही सभी परीक्षाएं स्थगित कर दी गईं थीं। जबकि परीक्षाएं 25 अप्रैल तक चलनी थीं। दो दिन की परीक्षाएं निरस्त भी कर दी गईं थीं। अधिकतर प्रश्नपत्रों की परीक्षाएं अभी बाकी हैं।