आगरा में कोरोना वायरस के लक्षणों को नजरअंदाज करना लोगों को भारी पड़ गया। खुद तो संक्रमित हुए ही परिजनों को भी बीमारी दे दी। स्वास्थ्य विभाग ने महिला-बच्चों की केस हिस्ट्री तैयार की, जिसमें यह जानकारी सामने आई है।
स्वास्थ्य विभाग ने शुरुआती 1126 मरीजों में संक्रमण की वजह, किसके संपर्क में आए, उनमें क्या लक्षण मिले, इनके आधार पर रिपोर्ट बनाई है। इसमें 29.10 फीसदी महिलाएं संक्रमित पाई गईं, जिसमें 20 से 40 साल की महिलाएं सबसे ज्यादा 49 प्रतिशत हैं। इसमें भी 21 से 30 साल की महिलाओं की संख्या अधिक रही, जिनकी ये 30% रहीं।
बच्चों की बात करें तो दस साल तक के 24 और 11 से 20 साल के 77 मरीज मिले। केस हिस्ट्री बनाने पर चिकित्सकों को पता चला कि महिला-बच्चों में संक्रमण उनके परिजनों से लगा, ये शुरुआत में बुखार, जुकाम-खांसी होने पर सामान्य समझकर खुद ही दवा लेते रहे। परेशानी बढ़ने पर लोग जांच कराने गए और पॉजिटिव पाए गए।
बुखार, खांसी, सांस में तकलीफ तो यहां कराएं जांच
वायरस के लक्षण प्रतीत होने पर लापरवाही न करें। जांच कराने नहीं जा रहे तो एसएन मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल की ट्राएज ओपीडी में दिखाएं। यहां पर चिकित्सक स्क्रीनिंग करने के बाद जांच कराएंगे, ये निशुल्क होती है। यदि प्राइवेट में जांच करानी है तो निजी लैब में 2500 रुपये फीस निर्धारित है।
लक्षण दिखें तो तत्काल जांच कराएं
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. आरसी पांडेय ने कहा कि शुरुआती दो-तीन महीने लोगों ने कोरोना के लक्षणों को गंभीरता से नहीं लिया। इससे उनके संपर्क से परिजन भी संक्रमित हुए। संक्रमित मामलों में सर्वाधिक ऐसे ही मामले हैं, जो अपने परिचित-परिजन से वायरस की चपेट में आए हैं। तेज बुखार रहना, सांस लेने में तकलीफ जैसी परेशानी हो तो तत्काल जांच कराएं।
बरसात का समय है अब ज्यादा खतरा
आईएमए आगरा के अध्यक्ष डॉ. राजीव उपाध्याय ने कहा कि तेज बुखार रहता है, खांसी भी है और सांस फूल रही है तो इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें। भलाई इसी में है कि इसकी तत्काल जांच कराएं। लोग मास्क बिना घर से कतई न निकलें, बेवजह बाजारों में न जाएं। सामाजिक दूरी का पालन बेहद जरूरी है। बरसात का समय है और संक्रमण का खतरा ज्यादा है।