कृष्णा नगर निवासी अरुन कंसल पुत्र शंभु दयाल को परिजनों ने संक्रमित होने पर उपचार के लिए रवि हॉस्पिटल में भर्ती किया था। 28 अप्रैल को मरीज की मौत हो गई। अस्पताल ने इलाज खर्च के 9,60,121 रुपये लेकर शव दिया। इलाज खर्च के बिल में 4,65,876 रुपये दवाई खर्च जोड़ा गया है।
मरीज से इलाज खर्च के नाम पर मनमानी वसूली के आरोप में जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह ने आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के पूर्व अध्यक्ष रवि मोहन पचौरी के देहली गेट स्थित रवि हॉस्पिटल को कोविड सूची से बाहर (डिबार) कर दिया है। रवि हॉस्पिटल में नए कोविड मरीज भर्ती पर रोक लगा दी गई है। 9.6 लाख रुपये के बिल पर स्पष्टीकरण मांगा है। स्पष्टीकरण नहीं देने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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कृष्णा नगर निवासी अरुन कंसल पुत्र शंभु दयाल को परिजनों ने संक्रमित होने पर उपचार के लिए रवि हॉस्पिटल में भर्ती किया था। 28 अप्रैल को मरीज की मौत हो गई। अस्पताल ने इलाज खर्च के 9,60,121 रुपये लेकर शव दिया। इलाज खर्च के बिल में 4,65,876 रुपये दवाई खर्च जोड़ा गया है।
कोविड रोगियों के उपचार के लिए शासन ने दरें निर्धारित कर रखी हैं। निर्धारित दरों से अधिक वसूली के आरोप पर जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह ने सोमवार को रवि हॉस्पिटल को कोविड सूची से डिबार कर दिया है। अस्पताल में नए मरीजों की भर्ती पर रोक लगा दी गई है। अस्पताल को पहले से भर्ती कोविड मरीजों का उपचार उनके स्वस्थ होने तक करना पड़ेगा।
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इलाज खर्च की शुल्क सूची भी चस्पा नहीं की
जिलाधिकारी पीएन सिंह ने बताया कि बार-बार कहने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने इलाज खर्च की शुल्क सूची चस्पा नहीं की। खाली बेड, वेंटिलेटर का ब्योरा चस्पा नहीं किया। अस्पताल को प्रतिबंधित किया है। अस्पताल प्रबंधन को इस मामले में उन्हें और सीएमओ को अपना स्पष्टीकरण देना पड़ेगा। ऐसा नहीं करने पर अस्पताल के विरुद्ध कठोर कार्रवाई होगी।
वेंटिलेटर पर था मरीज, बाहर से मंगाईं दवाएं
19 दिन मरीज मेरे यहां वेंटिलेटर पर भर्ती रहा। बाहर से दवाएं मंगानी पड़ीं। इसलिए बिल अधिक आया है। प्रशासन ने बिना जांच के कार्रवाई की है। मैं स्पष्टीकरण दे दूंगा। - रवि मोहन पचौरी, पूर्व अध्यक्ष, आईएमए
नॉन-कोविड भी वसूल रहे मरीजों से लाखों रुपये
शहर में 25 कोविड अस्पताल हैं। जहां मरीजों के इलाज खर्च तय है। 350 से अधिक नॉन कोविड अस्पताल हैं। कमला नगर सी-ब्लॉक स्थित नॉन कोविड अस्पताल में कोविड मरीजों को अवैध तरीके से भर्ती कर लाखों रुपये वसूले जा रहे हैं। कोविड सूची में नहीं होने के कारण प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग द्वारा निगरानी नहीं हो रही। ऐसे में मरीजों से ‘लूट’ हो रही है। सी-ब्लॉक रेजीडेंशियल वेलफेयर एसोसिएशन के शिशिर अग्रवाल और चंदन कालरा ने डीएम से इस अस्पताल को बंद कराने की मांग की है। उनका कहना है कोविड मरीज और उनके परिजन रिहायशी इलाके में बाहर घूमते रहते हैं। इससे क्षेत्र में संक्रमण फैलने की आशंका है।
टीम भेजकर कराएंगे जांच
नॉन कोविड अस्पताल सिर्फ संदिग्ध मरीज रख सकते हैं। उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर कोविड में रेफर करेंगे। सी-ब्लॉक के अस्पताल सहित अन्य जगह जहां इस तरह की शिकायतें मिल रही हैं, वहां टीम भेजकर जांच कराई जाएगी। मनमानी वसूली के साक्ष्य मिलने पर मुकदमा होगा। - प्रभु एन सिंह, जिलाधिकारी
जनता का दर्द
पांच दिन में तीन लाख रुपये वसूले
न्यू आगरा पुलिस थाने के बराबर से गली में एक नॉन कोविड हॉस्पिटल है। मैं पांच दिन भर्ती रहा। एंटीजन टेस्ट पॉजिटिव था। तीन लाख रुपये बिल के वसूल लिए। यहां अभी भी कई कोविड मरीज भर्ती हैं। - राजेंद्र गुप्ता, कमला नगर
भर्ती के समय एक लाख रुपये जमा कराए
- पिता की सांस फूलने पर रामबाग के अस्पताल में भर्ती किया। वेंटिलेटर नहीं मिला। ऑक्सीजन बेड दिया। एक लाख रुपये जमा करा लिए। मैंने विरोध किया तो चिकित्सक ने भर्ती से मना कर दिया। मजबूरन रुपये देने पड़े। - मनोज शर्मा, विजय नगर