ज्योतिषाचार्य रामचंद्र शर्मा वैदिक
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धार्मिक मान्यता है कि जिस दिन सूर्यास्त के बाद एक घड़ी अधिक तक अमावस्या तिथि रहे, उस दिन दीपावली मनाई जाती है। इस वर्ष 13 नवंबर को दोपहर 2.18 तक चतुर्दशी, बाद में अमावस्या प्रारंभ होगी, जोकि 14 को सुबह 10.37 तक रहेगी। इसलिए 14 नवंबर को महालक्ष्मी पूजन होगा और दीवाली मनेगी।
15 नवंबर को सुबह 10.37 बजे के बाद गोवर्धन पूजा और अन्नकूट महोत्सव के आयोजन होंगे। 16 नवंबर को प्रतिपदा सुबह 7.06 बजे तक है। बाद में द्वितीया प्रारंभ होगी। इस तरह तिथि गणना के अनुसार दीप पर्व पांच नहीं चार दिनों का ही होगा। आचार्य वैदिक ने बताया कि इस तरह रूप चौदस व दीवाली 14 नवंबर को मनाई जाएंगी।
द्वितीया तिथि का हो रहा है क्षय
आगरा की ज्योतिषाचार्य पूनम वार्ष्णेय ने बताया कि पंचांग की गणना के अनुसार इस बार द्वितीया तिथि का क्षय हो रहा है। इसके अनुसार दीप पर्व में रूप चौदस सुबह तो महालक्ष्मी पूजन शाम को किया जा सकेगा। पूर्व में भी इस तरह दीपोत्सव मनाए जा चुके हैं। दीपोत्सव की शुरुआत 13 नवंबर को धनतेरस के साथ होगी। 14 को नरक चौदस या रूप चौदस और शाम को दीवाली पूजन होगा।