स्थायी टेस्ट के दौरान पकड़ी खामी
रायभा, अछनेरा के वेदपाल ने एक अप्रैल को फेसलेस माध्यम से लर्निंग लाइसेंस बनवाया था। एक जुलाई को वह स्थायी लाइसेंस के लिए पुलिस लाइन में टेस्ट देने पहुंचे तो वह पैरों से विकलांग थे। इस पर लाइसेंस को निरस्त किया गया। मलपुरा के राकेश की एक आंख खराब थी। उनका भी लर्निंग लाइसेंस बन गया। इसी तरह पिनाहट के बाबू के दोनों हाथों में विकलांगता पाई गई। इन सभी के लाइसेंस निरस्त किए गए।
‘सॉफ्टवेयर में हो रहा बदलाव’
दिव्यांगों के लर्निंग लाइसेंस बनवाने के मामले की जानकारी मिली है। ऐसे लाइसेंस तुरंत निरस्त किए जाते हैं। यह सॉफ्टवेयर की खामी है। इसमें मेडिकल सर्टिफिकेट लगाने की व्यवस्था भी होनी चाहिए। हालांकि अब सॉफ्टवेयर में एनआईसी द्वारा कुछ बदलाव किए जा रहे हैं। इसमें एक आईडी से बहुत लोग आवेदन नहीं कर पाएंगे।