मैनपुरी। उर्वरक बिक्री में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग ने प्रयास शुरू कर दिए हैं। शासन के आदेश पर सभी उर्वरक विक्रेताओं को डिजिटल भुगतान के लिए क्यूआर कोड जनरेट कराने के आदेश जारी किए गए हैं। माह के अंत तक उन्हें हर हाल में क्यूआर कोर्ड जारी कराना होगा। हालांकि अभी क्यूआर कोर्ड से भुगतान की अनिवार्यता नहीं होगी।
मैनपुरी कृषि प्रधान जिला है, कृषि योग्य भूमि का क्षेत्रफल और किसानों की संख्या अधिक होने के चलते उर्वरकों की खपत भी अधिक है। उर्वरकों की खरीद और बिक्री में पीओएस लागू होने के बाद अब डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा दिया जाएगा। शासन के आदेश पर जिला कृषि अधिकारी ने सभी उर्वरक विक्रेताओं को इस संबंध में पत्र जारी किया है। इसमें उन्हें डिजिटल पेमेंट के लिए क्यूआर कोड जनरेट करवाकर दुकान पर चस्पा कराने के आदेश दिए गए हैं।
जिले में फुटकर बिक्री करने वाले कुल छह सौ के करीब विक्रेता हैं। इन सभी को क्यूआर कोड जनरेट कराना होगा। इसके लिए उन्हें जनवरी के अंत तक का समय दिया गया है। इसके साथ ही उर्वरक विक्रेताओं को कृषि विभाग से फोन कर जागरूक भी किया जा रहा है। उन्हें बताया जा रहा है कि क्यूआर कोड से केवल खाते में धनराशि डाली जा सकती है, निकाली नहीं। उनकी अन्य समस्याओं को भी दूर कर क्यूआर कोड जनरेट कराने के लिए उन्हें राजी किया जा रहा है।
डिजिटल भुगतान की नहीं है अनिवार्यता
कृषि विभाग के अनुसार शासन के आदेश पर सभी उर्वरक विक्रेताओं को क्यूआर कोर्ड जनरेट कराने के लिए पत्र भेजा गया है। हालांकि अभी डिजिटल भुगतान की अनिवार्यता नहीं की गई है। हालांकि उर्वरक विक्रेता की ये जिम्मेदारी है कि वे अधिक से अधिक किसानों को डिजिटल भुगतान के प्रति जागरूक करें। अप्रैल से इसकी अनिवार्यता होने की बात कही जा रही है।
क्यूआर कोड के लिए यहां करें संपर्क
उर्वरक विक्रेताओं को क्यूआर कोड जनरेट कराने में समस्या न हो इसके लिए विभाग ने विभिन्न कंपनियों के प्रतिनिधियों से भी संपर्क किया है। जिला कृषि अधिकारी डॉ. गगनदीप सिंह ने बताया कि उर्वरक विक्रेता श्याम गुप्ता के मोबाइल नंबर 7037911907 और विजय सिंह के मोबाइल नंबर 8650810655 पर संपर्क कर क्यूआर कोड जनरेट करा सकते हैं। ये पूरी तरह निशुल्क है।
सभी उर्वरक विक्रेताओं को क्यूआर कोड जनरेट कराने के लिए आदेश जारी किया गया है। विक्रेता हर हाल में जनवरी में ही क्यूआर कोड जनरेट करा लें। इसमें लापरवाही न की जाए।
डॉ. गगनदीप सिंह, जिला कृषि अधिकारी।