स्कूल में डिजिटल बोर्ड पर पढ़ाई करते विद्यार्थी।
आगरा के परिषदीय विद्यालयों में अब पढ़ाई का तरीका बदलने जा रहा है। किताबों के साथ-साथ तकनीक के माध्यम से बच्चों को पढ़ाया जाएगा, जिससे उनकी समझ, कौशल और आत्मविश्वास को मजबूत किया जा सके।
परिषदीय विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और प्रभावी बनाने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने मौजूदा शैक्षिक सत्र से डिजिटल लर्निंग को अनिवार्य रूप से लागू करने का निर्णय लिया है। अब कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए सप्ताह में कम से कम एक पीरियड डिजिटल लर्निंग का होगा, जिसमें बच्चों को तकनीक के माध्यम से पढ़ाया जाएगा।
बीएसए जितेंद्र कुमार गोंड ने बताया कि बदलते समय में बच्चों को केवल पुस्तकीय ज्ञान देना पर्याप्त नहीं है। उन्हें तकनीक के साथ जोड़ना जरूरी है, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों का सामना कर सकें। डिजिटल लर्निंग क्लास का उद्देश्य बच्चों को स्मार्ट तरीके से सीखने के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने बताया कि इन कक्षाओं में बच्चों को ई-कंटेंट, वीडियो लेक्चर, इंटरएक्टिव क्विज, स्मार्ट बोर्ड और डिजिटल टूल्स के माध्यम से पढ़ाया जाएगा। इससे पढ़ाई रोचक बनेगी और बच्चे विषयों को आसानी से समझ सकेंगे।
कहा कि डिजिटल लर्निंग से बच्चों की समझने की क्षमता बढ़ेगी। इसमें विजुअल और ऑडियो माध्यम का उपयोग होने से बच्चों की रुचि पढ़ाई में बढ़ेगी और वे ज्यादा सक्रिय होकर सीखेंगे। इन कक्षाओं में बच्चों को बेसिक कंप्यूटर ज्ञान, इंटरनेट का सही उपयोग, ऑनलाइन लर्निंग टूल्स, डिजिटल कंटेंट की समझ और प्रेजेंटेशन स्किल्स सिखाई जाएंगी।
साथ ही विषयों को एनिमेशन और वीडियो के माध्यम से समझाया जाएगा। बताया कि आज के दौर में हर क्षेत्र में तकनीक का उपयोग बढ़ रहा है। ऐसे में बच्चों को शुरुआती स्तर से ही डिजिटल शिक्षा देना जरूरी हो गया है। इससे वे न केवल पढ़ाई में बेहतर होंगे, बल्कि भविष्य में रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी तैयार रहेंगे।