पीजीआई चंडीगढ़ के बाल रोग विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. सुनित सिंघी ने बताया कि पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) में भर्ती 110 बच्चों पर अध्ययन किया। इसमें एक एमएम की डिवाइस कैथेटर से दिमाग में पहुंचाया। इससे ऑक्सीजन की मात्रा, रक्त का संचार, बेहोश होने पर मस्तिष्क के संचालन समेत अन्य की जानकारी मॉनीटर के जरिये रिकॉर्ड कीं। इसके आधार पर इलाज कर 55 बच्चों की जान बच गई। ये काफी बेहतर दर है। नेशनल पीडियाट्रिक इंफेक्शन डिजीस एकेडमी के अध्यक्ष डॉ. संजय घोरपड़े ने बताया कि दिमागी संक्रमण और बुखार से बच्चों में दौरे की भी परेशानी बढ़ रही है। कार्यशाला में डॉ. अजय कालरा, डॉ. जेएन टंडन, डॉ. पंकज कुमार, डॉ. अनीता हेगड़े, डॉ. बाला सुब्रह्मण्यम, डॉ. आरएन शर्मा, डॉ. एनसी प्रजापति आदि मौजूद रहे।
एंटीबायोटिक की गाइडलाइन बनाने को भेजा पत्र
आयोजन अध्यक्ष डॉ. राकेश भाटिया ने बताया कि बुखार-खांसी, जुकाम में भी एंटीबायोटिक दवाएं दी जा रही है। इससे ये रेसिस्टेंट हो रही हैं। बीते 20 साल में कोई नई एंटीबायोटिक दवा की खोज नहीं की है। ऐसे में सरकार को एंटीबायोटिक के लिए चिकित्सक का पर्चा जरूरी करने का सुझाव दिया है।