हाल ये है कि हम आज भी अपने देश में शिक्षा मंत्रालय नहीं बना पाए शिक्षा मंत्रालय को आज भी मानव संसाधन मंत्रालय से जोड़कर चलाया जा रहा है। उन्होंने छात्र-छात्राओं से सीधा संवाद भी किया।
सिसौदिया ने कहा कि केवल सोच का अंतर है एक नौकर और मालिक को कुछ लोग अलग-अलग नजर से देखते हैं। जबकि सही बात यह है कि मालिक ने मकान और दुकान खड़ी की है, फैक्ट्री खड़ी की है।
लेकिन उसमें इनकम का जरिया नौकर ने बनाया है। यह दोनों एक दूसरे के पूरक है। उन्होंने कहा कि देश में मजदूर और अमीरों के बीच खाई बढ़ रही है इसे कम करने की जरूरत है।