लापरवाही से हो सकता है हादसा
संचालक फायर विभाग से एनओसी लेने के बाद इंतजामों की देखरेख तक नहीं करते हैं। बाहर जाने वाले आपातकालीन मार्ग अतिक्रमण से अवरुद्ध हो जाता है। पानी के टैंक पर ध्यान नहीं दिया जाता है। पंप को चलाकर नहीं देखते हैं। फायर सिस्टम पर भी ध्यान नहीं दिया जाता है। हादसा होने पर उपकरण काम नहीं करते हैं। जिले में 430 अस्पताल स्वास्थ्य विभाग से पंजीकृत हैं। इनमें से 302 अस्पताल की एनओसी है। बिना एनओसी के 128 अस्पताल संचालित हो रहे हैं।
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जूता कारखानों, केमिकल गोदामों में अग्निकांड
अस्पताल ही नहीं, जूता और केमिकल गोदामों में अग्निकांड की घटनाएं हो चुकी हैं। 8 महीने पहले मंटोला में दो केमिकल गोदाम में आग लगी थी। आसपास के घरों को भी नुकसान हुआ था। शाहगंज, सिकंदरा, एत्माद्दाैला, लोहामंडी, ताजगंज, ट्रांस यमुना इलाके में जूता कारखाने, गत्ता फैक्टरी, केमिकल गोदाम में अग्निकांड की घटना हो चुकी हैं। शहर में जूते की फैक्टरी से लेकर छोटे कारखाने खुले हुए हैं। घरों और निजी भवनों में बिना फायर एनओसी धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। अग्निशमन विभाग ने जूता और गत्ता की तकरीबन 250 फैक्टरी को ही एनओसी दी हैं, जबकि छोटे कारखानों की संख्या 1 हजार से अधिक है। अग्निकांड के बाद अधिकारी जांच की खानापूर्ति करते हैं।
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