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इमरजेंसी के वक्त की कड़वी यादें भूल न सके लोकतंत्र रक्षक सेनानी

Tue, 26 Jun 2018 04:28 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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लोकतंत्र रक्षक सेनानी चौधरी योगेंद्र सिंह - फोटो : अमर उजाला
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1975 में देश में लगाई गई इमरजेंसी में जेल काट चुके लोकतंत्र रक्षक सेनानी चौधरी योगेंद्र सिंह इमरजेंसी को देश के लिए कलंक मानते हैं। 1975 की यादें उनके जेहन में आज भी बसी हुई हैं। 
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25 जून 1975 की रात देश में इमरजेंसी लगी थी। नौहझील थाना क्षेत्र के गांव मुसमुना निवासी चौ. योगेंद्र सिंह उस दौरान भारतीय लोकदल के सक्रिय सदस्य थे। 

चरण सिंह की पार्टी के इस युवा और तेज तर्रार कार्यकर्ता को सात अगस्त 1975 को इमरजेंसी के दौरान पुलिस ने उठा लिया। इनके साथ चार अन्य साथियों को भी जेल में डाल दिया गया। 
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इनके उस वक्त के सभी साथी चल बसे हैं। उन दिनों को याद करते हुए उन्होंने बताया कि उस वक्त के लोकतंत्र से आज का लोकतंत्र बेहतर है। इमरजेंसी को वह अपने जीवन में काला अध्याय मानते हैं। 

बताया कि उस वक्त लोकतंत्र खतरे में था और मीडिया पर भी खबर छापने के लिए प्रतिबंध लगा दिया था। आज कम से कम चौथा स्तंभ विपक्ष की बात रखने के लिए स्वतंत्र है। 

दो माह 23 दिन जेल में गुजार चुके लोकतंत्र रक्षक सेनानी योगेंद्र सिंह वर्तमान प्रदेश एवं केंद्र की सरकार द्वारा दिए जा रहे सम्मान से संतुष्ट हैं। 

उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री चरण सिंह व पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव द्वारा सम्मान पत्र भी दिया जा चुका है। उन्होंने मांग की है कि जिन लोकतंत्र रक्षक सेनानियों का निधन हो चुका है, उनकी पत्नियों को पेंशन दी जाए। 
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