पुलिस की पूछताछ में आरोपी सत्येंद्र ने बताया कि वह बीटेक कर चुका है। छह महीने पहले कानपुर स्टेशन पर उसकी मुलाकात दिल्ली की नीलम से हुई थी। दोनों की दोस्ती हो गई। वह मिलने लगे। रितेश और जितेंद्र ने भी बीटेक किया है। तीनों नौकरी की तलाश में दिल्ली गए थे। यहां पर नीलम के घर में ही रुके।
नौकरी नहीं मिलने पर नीलम ने लोगों को ठगी के जाल में फंसाने का प्लान बनाया। इसके लिए फेसबुक पर अपने नाम से आईडी बनाई। इस पर एक युवती का फोटो लगाया। पहले अपने परिचितों से मदद के नाम पर रुपये जमा करा लिए। बाद में अन्य लोगों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजकर दोस्ती की। युवकों को प्यार का झांसा भी देती थी। इसके बाद मदद के नाम पर रकम जमा करा लेती थी।
छह महीने में गैंग ने 15 से अधिक लोगों को अपना शिकार बनाया। इनसे पांच लाख रुपये से अधिक खाते में जमा करा चुके हैं। पुलिस के पास पांच से अधिक पीड़ित आ गए हैं। दस और पीड़ितों के आने की संभावना है। पुलिस ने आरोपी सत्येंद्र को मंगलवार को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
जनक नगर, सहारनपुर निवासी आदित्य कुमार गैंग के जाल में फंस गया था। उससे युवती ने कहा था कि वह बीटेक द्वितीय वर्ष की छात्रा है। वह फीस जमा नहीं कर पा रही है। इस कारण परीक्षा में नहीं बैठ सकेगी। आदित्य से मदद मांगी। उससे 60 हजार रुपये जमा करा लिए। ठगी का पता चलने पर आदित्य ने थाना सिकंदरा में मुकदमा दर्ज कराया था।
युवती ने पंजाब नेशनल बैंक में खाता खोला था। लोगों से मिलने वाली रकम को इसी खाते में जमा कराया जा रहा था। अब पुलिस इस खाते में पड़ी रकम की जानकारी लेगी। आरोपियों को जो भी रकम मिलती थी, वह उसे अपने शौक पूरे करने में खर्च करते थे।
शहर में पिछले दिनों हनी ट्रैप में कई लोग फंस गए थे। बीएसएनएल के अधिकारी से युवती ने फेसबुक पर दोस्ती की थी। इसके बाद उनसे फोटो मंगवाकर ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया था। इसी तरह एक कारोबारी को भी ब्लैकमेल किया गया था। उन्होंने पुलिस से शिकायत की थी। रेंज साइबर सेल जांच कर रही है।
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