भाजपा ओबीसी मोर्चा ने पिछड़े वर्गों की समस्याओं पर प्रधानमंत्री के साथ किया मंथन
डेढ़ घंटे से ज्यादा देर तक चली बैठक में अमित शाह और रामलाल भी रहे मौजूद
बिहार चुनाव में मिली शिकस्त के बाद भाजपा उत्तर प्रदेश में कोई रिस्क नहीं लेना चाहती। खासतौर से जातिगत समीकरणों के मामले में। एक तरफ दलित कार्ड खेला जा रहा है तो दूसरी तरफ अब पिछड़े वर्ग में भी अपना किला मजबूत करने के लिए मोर्चेबंदी शुरू कर दी है। इसके लिए भाजपा का ओबीसी मोर्चा अभी से सक्रिय हो गया है। दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में पिछड़ों की समस्याओं के समाधान के बहाने प्रदेश में ‘पिछड़ों की राजनीति’ का तानाबाना बुना गया। मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. एसपी सिंह ने पिछड़े वर्गों की तमाम समस्याओं को उठाया।
रविवार रात को दिल्ली में हुई बैठक का उद्देश्य विशुद्ध रूप से पिछड़े वर्ग के उत्थान पर आधारित था लेकिन जड़ में प्रदेश में होने वाले 2017 के विधानसभा चुनाव की नींव भी थी। ताकि 2017 के चुनाव तक केंद्र सरकार की किसी योजना के सहारे पिछड़ों को भाजपा के पक्ष में लाया जा सके। बता दें कि प्रदेश के चुनाव में पिछड़ी जातियों के वोटर काफी अहम भूमिका निभाते हैं। वर्ष 2012 के चुनाव में सपा इन्हीं की बदौलत पूर्ण बहुमत पाने में कामयाब रही थी। इससे पहले बसपा भी पिछड़ों के बल पर सत्ता का सुख भोग चुकी है। मगर, पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह (वर्तमान में राजस्थान के राज्यपाल) की प्रदेश से विदाई के बाद से भाजपा अब तक इन्हें एकजुट नहीं कर पाई है। अब मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. एसपी सिंह इस खाई को पाटने में जुटे हैं। दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, महामंत्री (संगठन) रामलाल, राष्ट्रीय महासचिव अनिल जैन के अलावा दर्जनभर से अधिक नेताओं के साथ बैठक में इसी वर्ग के लिए रणनीति तैयार करने पर डेढ़ घंटे से अधिक मंथन हुआ। इसमें श्रमजीवी जातियों के उत्थान के लिए एक विश्वविद्यालय की स्थापना पर भी चर्चा हुई। जहां विलुप्त होतीं कलाओं के विकल्प की पूर्ति के लिए कौशल विकास के तहत युवाओं को आधुनिक तकनीक में पारंगत किया जा सके। इसके अलावा केंद्रीय विभागों में बैकलॉग के जरिये आरक्षण का लाभ देने और पिछड़ों के लिए एक संवैधानिक आयोग के गठन का प्रस्ताव रखा गया।