पूरा शहर भाई-बहन दीप्ति और सुमित की जुगलबंदी की तारीफ करने में जुटा है। हर कोई दीप्ति से फोटो खिंचवाने के लिए अभी से परिवार से गुजारिश कर रहा है। हर किसी की जुबान पर दीप्ति और उसके भाई सुमित की मेहनत की चर्चा है। मगर, इस तारीफ से इतर कभी एक दौर था जब लोग दीप्ति को क्रिकेट खेलने के लिए भेजने पर माता-पिता से सवाल करते थे।
पिता श्रीभगवान शर्मा बताते हैं कि वह जब बेटे-बेटी को क्रिकेट खेलने के लिए भेजते, तो लोग लड़की को सिर न चढ़ाने के लिए कहते। कुछ कहते कि चोट लग गई तो शादी-ब्याह में दिक्कत होगी। हालांकि उन्हें यकीन था कि उनके बच्चे जो चाहते हैं, हासिल कर ही लेंगे। इसी वजह से उन्होंने हमेशा साथ दिया।
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श्रीभगवान शर्मा ने बताया कि बचपन में जब वह बेटी को खेलने के लिए स्टेडियम भेजते तो लोग सवाल उठाते थे। रिश्तेदार भी शहर से बाहर अकेले जाने पर टोका करते थे। हालांकि अब उसके आसमान छूने पर वही रिश्तेदार एक फोटो खिंचवाने के लिए गुजारिश करते हैं। वह कहते हैं कि उन्हें किसी के कुछ भी कहने का कोई शिकवा नहीं क्योंकि उन्हें अपने बच्चों पर यकीन था। उनके यकीन को ही सुमित और दीप्ति की मेहनत व लगन ने सच साबित कर दिखा दिया।
सफलता को हावी मत होने दो
पिता ने कहा कि वह हमेशा बच्चों से एक बात कहते रहे हैं। सफलता के लिए जी-तोड़ मेहनत करो लेकिन उसे अपने पर हावी मत होने देना। सफलता के साथ शोहरत घमंड लेकर आती है। कहा कि जब भी दोनों बच्चे साथ होते, तो वह लोगों से प्यार से बात करना और अपनी जमीन से जुड़े रहने की सलाह ही देते। भगवान का शुक्र जताते हुए कहा कि आज भी बच्चों ने उस बात का ध्यान रखा है।
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सफाई करने पहुंचे कर्मी, लोग बोले- चलो आए तो
दीप्ति के घर पर हलचल बढ़ने के साथ ही प्रशासनिक अमला भी हरकत में आ गया। नगर निगम के कर्मचारियों ने भी वीआईपी जोन में तब्दील हो चुकी दीप्ति की काॅलोनी के आसपास सफाई शुरू कर दी। चूना छिड़ककर क्षेत्र को चकाचक किया गया। वहीं, अफसरों ने खुद ही परिवार से मिलकर बधाई दी। इस दौरान आसपास मौजूद लोगों ने चुटकी लेते हुए कहा कि चलो आए तो। वहीं, पड़ोसी ने निगम के अधिकारियों को क्षेत्र की कुछ टूटी सड़कों के गड्ढों को भरवाने की बात कही।