मैनपुरी। दिल की बीमारी से पीड़ित दो मरीज इलाज के लिए जिला अस्पताल लाए गए। यहां हृदयरोग विशेषज्ञ के तैनात न होने से दोनों को उचित उपचार नहीं मिल सका। कुछ ही देर बाद दोनों मरीजों ने दम तोड़ दिया। जिला अस्पताल में हृदयरोग विशेषज्ञ की तैनात न होने से परिजनों में शासन और प्रशासन के प्रति आक्रोश है।
मैनपुरी जिले की आबादी करीब 21 लाख है, लेकिन जिले के किसी भी सरकारी अस्पताल में एक भी हृदयरोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। जिला अस्पताल में भी ढाई वर्ष से हृदयरोग विशेषज्ञ का पद खाली पड़ा हुआ है। विशेषज्ञ डॉक्टर न होने से जिले में मरीजों को उचित उपचार नहीं मिल पाता है। इससे आए दिन दिल की बीमारी से पीड़ित मरीजों की मौत हो रही है।
नगर के मोहल्ला हरीपुरम नरिवासी महेश(60) को सोमवार को दिल का दौरा पड़ा। परिजन उन्हें लेकर जिला अस्पताल पहुंचे, यहां हृदयरोग विशेषज्ञ के न होने से महेश को उचित उपचार नहीं मिल सका और उनकी मौत हो गई। वहीं कोतवाली थाना क्षेत्र के नगला भगीला निवासी 80 वर्षीय वेदराम को भी रविवार की रात दिल का दौरा पड़ा परिजन जिला अस्पताल लाए। यहां उपचार के दौरान वेदराम की मौत हो गई।
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फिजीशियन देते हैं उपचार
जिला अस्पताल में दिल की बीमारी से पीड़ित औसतन 50 से 60 मरीज प्रतिदिन जिला अस्पताल में पहुंचते हैं। हृदय रोग विशेषज्ञ न होने के कारण फिजीशियन से ही उन्हें उपचार दिया जा रहा है। इनमें से आठ से 10 मरीजों को गंभीर हालत में भर्ती भी कराना पड़ता है। इनमें से औसतन सात से आठ मरीजों को रेफर ही कर दिया जाता है।
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300 से मरीज कराते हैं प्रतिदिन ब्लडप्रेशर की जांच
जिले में दिल के मरीज इतनी बड़ी संख्या में हैं कि अकेले जिला अस्पताल में 200 से 300 मरीज प्रतिदिन ब्लडप्रेशर की जांच के लिए पहुंचते हैं। इसके चलते सीएमएस को अलग से ब्लडप्रेशर की जांच के लिए कक्ष स्थापित करना पड़ा है।
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सीएमएस डॉ. आरके सागर से दो टूक
सवाल: जिला अस्पताल में ढाई साल से हृदयरोग विशेषज्ञ नहीं है, तैनाती के क्या प्रयास किए गए।
जवाब: हृदयरोग विशेषज्ञ की तैनाती के लिए कई बार शासन स्तर पर पत्रचार किया गया है।
सवाल: हृदयरोग विशेषज्ञ न होने से दो मरीजों की मौत हो गई, क्या कहेंगे आप।
जवाब: दोनों मरीजों को गंभीर हालत में लाया गया था।
सवाल: दिल के मरीजों के इलाज की जिले में क्या व्यवस्था है।
जवाब: फिजीशियन से मरीजों का इलाज कराया जाता है।