जसवंतनगर विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में हारने के बाद मुलायम सिंह यादव एमएलसी बनकर विधान परिषद में नेता विपक्ष बने। तीन मार्च 1984 को वह थाना कुर्रा क्षेत्र के गांव मई खेड़ा में रामेश्वर सिंह की बेटी की में बराती के रूप में आए थे, तभी ये घटना हुई।
समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव का जैसे-जैसे राजनीति में कद बढ़ा, वैसे-वैसे उनके दुश्मन भी बढ़े। वर्ष 1984 में करहल क्षेत्र में जानलेवा हमला करके गोलियों की बौछार की गई। जानलेवा हमले में मुलायम सिंह यादव बच गए।
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बात वर्ष 1980 की है, जब जसवंतनगर विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में हारने के बाद मुलायम सिंह यादव एमएलसी बनकर विधान परिषद में नेता विपक्ष बने। तीन मार्च 1984 को वह थाना कुर्रा क्षेत्र के गांव मई खेड़ा में रामेश्वर सिंह की बेटी की में बराती के रूप में आए थे। रात 10 बजे एंबेसडर कार में बैठकर मुलायम सिंह यादव करहल की तरफ चल दिए। उनके साथ करहल के नेता रामेश्वर दयाल यादव और बच्ची लाल यादव भी थे।
एंबेसडर कार सरकारी थी और चालक भी सरकारी। कार मई खेड़ा से बंबा की पटरी होकर गांव अंबरपुर के सामने पहुंची। वहां आम के बाग में छिपे बदमाशों ने कार पर फायरिंग शुरू कर दी। नेत्रपाल सिंह यादव घायल हुए। छोटेलाल की मौके पर ही मौत हो गई। नेताजी कार के अंदर झुक गए। गोलीबारी की आवाज सुनकर आसपास के लोग घटनास्थल पर पहुंच गए। फायरिंग करने वाले बदमाश मौके से भाग गए। उसी कार से नेताजी इटावा रात को ही चले गए थे। बाद में नेताजी नेत्रपाल सिंह यादव से मिलने आगरा के अस्पताल में भी गए थे।