पति-पत्नी के बीच विवाद में एक मासूम भी पिस रही है। जन्म के बाद से पिता की गोद में नहीं आ सकी है। अब वह पांच साल की हो गई। रविवार को परामर्श केंद्र में बेटी मां के साथ आई। मगर, काउंसलर ने जब उसे पिता को दिखाया तो पहचानने से ही इनकार कर दिया। हालांकि मासूम की मां भी ससुराल नहीं जाना चाहती थी। इस पर फाइल बंद कर दी गई।
धौलपुर निवासी युवक की शादी आठ साल पहले आगरा की युवती से हुई थी। शादी के बाद छोटी-छोटी बातों को लेकर पति-पत्नी के बीच झगड़ा शुरू हो गया। शादी के तीन साल बाद पत्नी अलग मायके में रहने लगी। वह गर्भवती भी थी। उसने एक बेटी को जन्म दिया। पति का आरोप है कि ससुरालियों ने पत्नी से मिलने नहीं दिया। इस कारण वह अपनी बेटी को भी नहीं देख सका। वह जब भी ससुराल आता, ससुराली उसे भगा देते थे। पत्नी भी वापस आने के लिए तैयार नहीं थी। पत्नी ने भरण पोषण के लिए कोर्ट में केस दायर कर दिया।
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पति ने परिवार परामर्श केंद्र में प्रार्थना पत्र दिया। इस पर दोनों पक्षों को बुलाया गया। यहां पर विवाहिता अपनी बेटी के साथ भी आई थी। काउंसलर बेटी को पिता के सामने लाए। बेटी ने पिता को नहीं पहचाना। इसके बाद पत्नी से बात की। पत्नी ने बताया कि पति उत्पीड़न करता है। इस कारण अलग रह रही है। उसे कभी मायके से लेने नहीं आया। विवाहिता ने पति के साथ जाने से इनकार कर दिया। इस पर फाइल बंद कर दी गई।
परिवार परामर्श केंद्र प्रभारी कमर सुल्ताना के मुताबिक, केंद्र पर 25 केस में सुनवाई के लिए परिजन बुलाए गए थे। 13 में ही दोनों परिवार आए। बाकी में एक ही पक्ष आए। चार की काउसंलिंग के बाद समझौता कर विदा किया गया।