यूपी बार काउंसिल की अध्यक्ष दरवेश सिंह यादव की 12 जून को हुई हत्या के मामले में पुलिस एक महीने में चश्मदीदों के बयान तक दर्ज नहीं कर पाई है। हत्यारोपी मनीष बाबू शर्मा की मौत हो जाने के बाद ही फाइल ठंडे बस्ते में डाल दी गई है। न तो यह मालूम चला है कि दरवेश की हत्या किस वजह से की गई और न ही अन्य आरोपियों की भूमिका साफ हो पाई है।
दीवानी कचहरी में एडवोकेट अरविंद मिश्रा के चेंबर में यह वारदात हुई थी। उस समय मौके पर दरवेश के परिवारीजन, कुछ वकील और मैनपुरी पुलिस लाइन में तैनात इंस्पेक्टर सतीश यादव मौजूद थे। दरवेश को गोली मारने के बाद एडवोकेट मनीष ने खुद को गोली मार ली थी। उपचार के दौरान मनीष ने भी दम तोड़ दिया था।
इसके बाद ही पुलिस की जांच पर ब्रेक लग गया। एफआईआर में मनीष की पत्नी वंदना और एडवोकेट विनीत गुलेचा को भी नामजद कराया गया था। इन दोनों के खिलाफ न तो पुलिस ने साक्ष्य जुटाए और न ही क्लीन चिट दी। जांच न्यू आगरा थाना पुलिस कर रही है। जांच अधिकारी राजेश पांडेय का कहना है कि कुछ लोगों के बयान दर्ज हो गए हैं। अभी कई के रह गए हैं। उन्हें नोटिस जारी किए जा चुके हैं।
पार्किंग समस्या का नहीं हुआ समधान
दरवेश यादव की हत्या के बाद दीवानी कचहरी में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए गए। वाहनों को अब चैंबर तक नहीं जाने दिया जा रहा। पार्किंग में जगह कम है। इस कारण अधिवक्ताओं और वादकारियों को एमजी रोड पर वाहन खड़े करने पड़ रहे हैं। लगातार यह मांग उठ रही है कि वकीलों और वादकारियों की पार्किंग अलग अलग की जाए। यह नहीं हो पा रहा है।