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UP: शेख सलीम चिश्ती की दरगाह या कामख्या मंदिर का गर्भ गृह प्रकरण,  29 जुलाई को होगी सुनवाई

Tue, 09 Jul 2024 09:39 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, आगरा

सार

शेख सलीम चिश्ती की दरगाह को कामाख्या देवी का मंदिर और जामा मस्जिद को कामाख्या माता मंदिर का परिसर बताते हुए जो वाद दायर किया गया, उसमें सुनवाई 29 जुलाई को होगी। कोर्ट ने सभी प्रतिवादियों को केस में अपना जवाब दाखिल दाखिल करने का अंतिम अवसर दिया है।
 
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court new - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आर्य संस्कृति संरक्षण ट्रस्ट के कामाख्या माता मंदिर केस की सुनवाई सोमवार को लघु वाद न्यायालय में हुई। किसी भी प्रतिवादी के हाजिर नहीं होने पर न्यायालय ने सभी प्रतिवादियों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए 29 जुलाई को आखिरी अवसर दिया है।
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केस के वादी अजय प्रताप सिंह ने बताया कि कामाख्या माता मंदिर केस श्रीकामाख्या माता आदि बनाम उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड आदि में 30 मई को न्यायालय ने सभी पक्षों को समन पैरवी के आदेश दिए थे। सोमवार को वादी पक्ष ने समन पैरवी का तलवाना दाखिल किया। न्यायालय ने पैरवी को पूर्ण मानते हुए सभी प्रतिवादियों को 29 जुलाई को केस में अपना जवाब दाखिल दाखिल करने का अंतिम अवसर दिया है। अधिवक्ता ने बताया कि 29 जुलाई को वह सलीम चिश्ती दरगाह और जामा मस्जिद फतेहपुर सीकरी के सर्वे के लिए प्रार्थनापत्र दाखिल करेंगे।
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अधिवक्ता ने बताया कि सलीम चिश्ती की दरगाह और जामा मस्जिद मूल रूप से सिकरवारों की कुलदेवी माता कामाख्या का गर्भगृह व मंदिर परिसर है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की अनेक रिपोर्ट सलीम चिश्ती दरगाह और जामा मस्जिद की शिल्पकला को हिंदू शिल्पकला बताती है। सलीम चिश्ती दरगाह और जामा मस्जिद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधीन एक संरक्षित स्मारक है।
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