शिकोहाबाद में हादसे में घायल हो गई हैं। टैक्सी चालक ने फोन करके मदद मांगी है। रुपये की जरूरत है। 50 हजार रुपये चालक के नंबर पर यूपीआई कर दो। इस पर नरोत्तम दत्ता ने रकम भेज दी। एक घंटे बाद दोबारा कॉल आया। इस बार कहा कि दिल्ली भेजना पड़ेगा। एक लाख रुपये और मांगे।
वीडियो में जो व्यक्ति नजर आ रहा था, उसके सिर्फ होंठ ही हिल रहे थे। शक होने पर उन्होंने कॉल काट दिया। फिर दोस्त को कॉल किया। उसने खुद को पुणे में बताया। धोखाधड़ी का पता चलने पर जिस यूपीआई में रुपये डाले थे, उस नंबर पर कॉल किया। वह नंबर बंद आया। वह शिकायत करने 30 मिनट बाद ही रेंज साइबर सेल में पहुंच गए।
दूसरे खाते में कर दी थी ट्रांसफर
रेंज साइबर सेल के प्रभारी शैलेष सिंह ने बताया कि मामले में तत्काल जांच की गई। पता चला कि फेसबुक से सेवानिवृत्त कर्नल के सहकर्मी का फोटो निकाला गया था। इसके बाद एआई तकनीक से फर्जी वीडियो कॉल किया गया। नरोत्तम दत्ता आवाज नहीं पहचान पाए। व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल वर्चुअल नंबर के माध्यम से शारजाह से की गई।
यूपीआई बंद नंबर पर चल रहा था। इससे रकम तमिलनाडु की एक बैंक के खाते में गई थी। वह खाता फर्जी आईडी पर खुला था। इससे भी रकम ट्रांसफर कर दूसरे खाते में भेजी गई थी। पुलिस ने इस खाते को फ्रीज करा दिया। बैंक अब इस रकम को वापस कर दिया है। सेवानिवृत्त कर्नल को रकम दे दी गई है। शारजाह में साइबर ठगी की जा रही है। वह डेबिट कार्ड के माध्यम से रकम निकाल रहा है।
कॉल करने वाले के बारे में पता करके ही रकम दें
साइबर सेल प्रभारी ने बताया कि अनजान नंबर से वीडियो कॉल आने पर विश्वास नहीं करें। जिस व्यक्ति के नाम पर मदद मांगी जा रही है, उसके पास कॉल करके पुष्टि कर लेनी चाहिए। एआई तकनीक से साइबर ठगी की जा रही है। इसलिए यह भी देख लें कि होंठ के अलावा पूरा चेहरा हिल रहा है या नहीं।
सोशल मीडिया एकाउंट पर उपलब्ध फोटो और वायस मैसेज का इस्तेमाल कर फर्जी वीडियो तैयार किए जा रहे हैं। साइबर ठगी होने पर जितनी जल्दी पुलिस को सूचना मिलेगी, उतनी ही रकम वापस मिलने की उम्मीद भी होती है।