तकनीक ने जिंदगी जितनी आसान बनाई है, शातिर साइबर ठगों ने उतना ही बड़ा जाल बिछा रखा है। जरा सोचिए, आप अपने कारोबार में व्यस्त हैं, तभी फोन पर किसी परिचित का व्हाट्सएप संदेश आता है- आरटीओ चालान। आप उत्सुकतावश उस एपीके फाइल पर क्लिक कर दूसरे कामों में व्यस्त हो जाते हैं। आपको अंदाजा भी नहीं होता कि यहीं से आपकी गाढ़ी कमाई लुटने की उल्टी गिनती शुरू हो गई। शहर में कचहरी घाट निवासी आटा-मैदा कारोबारी दिनेश अग्रवाल के साथ ऐसा ही हुआ। उनके खाते से 9.61 लाख रुपये निकल गए।
लौटे रुपयों ने दी थी थोड़ी देर की राहत
कारोबारी दिनेश अग्रवाल का मोतीगंज में थोक कारोबार है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे उनके एक रिश्तेदार के नंबर से आरटीओ चालान के नाम से एक एपीके फाइल आई। उन्होंने फाइल खोलने की कोशिश की लेकिन वह नहीं खुला। वह काम में व्यस्त हो गए। दोपहर करीब 3 बजे अचानक उनके मोबाइल पर धड़ाधड़ संदेश आने लगे कि यूपीआई माध्यम से 4 लाख रुपये निकल चुके हैं। उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्होंने तुरंत बैंक को सूचना दी। हालांकि, गनीमत रही कि साइबर अपराधियों ने जिन खातों में रकम भेजी थी, तकनीकी खामी के चलते वह रकम रिसीव नहीं हुई और घूम-फिर कर उनके खाते में आ गई। उन्होंने राहत की सांस ली।
ठगों ने चला तुरंत नया दांव
वह समझ ही नहीं पा रहे थे कि आखिर माजरा क्या है। वह इस बारे में परिचितों से बात कर रहे थे, इसी बीच साइबर ठगों ने उससे बड़ा दांव चल दिया। शातिर ने तुरंत रणनीति बदली और नेट बैंकिंग का रुख किया। खाता ब्लॉक करवाने या पुलिस तक बात पहुंचने से पहले ही अपराधियों ने उसी खाते से नेट बैंकिंग के जरिये धड़ाधड़ 5 बार में 9.61 लाख रुपये दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दिए। कुल मिलाकर ठगों ने करीब 13 लाख रुपये इधर-उधर करने की कोशिश की, जिसमें से 9.61 लाख रुपये दूसरे खातों में पहुंच ही गए।
हेल्पलाइन नंबर और पुलिस की ली मदद
पीड़ित कारोबारी ने तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर अपनी शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद थाना छत्ता और शनिवार सुबह थाना साइबर क्राइम पुलिस को भी मामले की लिखित जानकारी दी, ताकि उनके खाते से कटे पैसों को तुरंत फ्रीज कराया जा सके। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
सावधान रहें, एक क्लिक कर सकता है कंगाल
डीसीपी ने बताया कि यह घटना एक बार फिर चेतावनी देती है कि व्हाट्सएप या किसी भी अन्य माध्यम से आने वाली किसी भी अज्ञात या संदिग्ध एपीके फाइल को भूलकर भी क्लिक या डाउनलोड न करें। किसी अपने के नंबर से भी अगर कोई ऐसी फाइल आए तो पहले फोन पर बात कर उसकी पुष्टि जरूर कर लें। वरना आपकी जरा सी लापरवाही आपकी बरसों की कमाई पल भर में उड़ा सकती है।
शिकायत मिल गई है। प्रथम दृष्टया यह सामने आया है कि संभवतः पहले पीड़ित के रिश्तेदार का मोबाइल हैक किया गया और फिर उनके नंबर से एपीके फाइल भेजकर आटा कारोबारी का फोन अपने नियंत्रण में लिया गया। पुलिस टीम उन तमाम बैंक खातों की कुंडली खंगाल रही है जिनमें रकम ट्रांसफर की गई है। जल्द ही आरोपियों तक पहुंचा जाएगा।
-आदित्य सिंह, डीसीपी साइबर क्राइम