दीपांशु सिविल इंजीनियर हैं। उन्होंने बताया कि बहन वंशिका बीफार्मा कर रही है। उसके ही स्कैंडल में पकड़ जाने का डर दिखाकर मां को दहशत में डाला गया। मां ने जब उन्हें बताया तो +92 नंबर देखकर ही समझ गया कि पाकिस्तान के नंबर से फर्जी कॉल किया गया है। इस पर बहन से वीडियो कॉल पर बात करके मां की भी कराई। मगर उनकी दहशत कम नहीं हुई। 15 मिनट तक साइबर अपराधियों ने उन्हें धमकाया था। घर आने पर वह ज्यादा नहीं बता सकीं। दीपांशु का कहना है कि मां पर घर की जिम्मेदारी थी।
कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति
हर थाने में साइबर हेल्प डेस्क बनी है। इन पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। मगर, पुलिस मामला साइबर सेल में भेज देती है। इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। कई बार पीड़ितों की रकम तक वापस नहीं हो पाती है।
शिकायत मिलने पर जांच कर मुकदमा दर्ज किया जाता है। इसके बाद टीम को लगाया जाता है। साइबर सेल और थाना पुलिस मिलकर साइबर ठगों के खिलाफ कार्रवाई करती है। जगदीशपुरा के मामले में कार्रवाई की जाएगी। -सूरज राय, डीसीपी सिटी