आगरा। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और केवी विश्वनाथन की पीठ 12 मई को स्पीड गवर्नर, जीपीएस ट्रैकर और पैनिक बटन से संबंधित अधिवक्ता केसी जैन की याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। तीन याचिकाओं पर 9 अप्रैल को आदेश पारित कर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए यह तिथि नियत की थी।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने बताया कि हर साल भारत में लगभग 1.5 लाख लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवा देते हैं। यानी हर घंटे 17 मौतें होती हैं। इनमें सबसे अधिक ओवरस्पीडिंग से होती हैं। केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम के मुताबिक, हर सार्वजनिक वाहन में स्पीड लिमिटिंग डिवाइस लगाना अनिवार्य है। याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 9 अप्रैल 2025 को केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि वह राज्यों से रिपोर्ट मंगाए।
जुलाई 2025 तक एक समग्र हलफनामा दाखिल करें। मगर जो हलफनामा दाखिल हुआ, वह अधूरा और असंतोषजनक पाया गया। अब इस पर 12 मई 2026 को फिर सुनवाई होगी। अगर बस, ट्रक या टैक्सी में स्पीड गवर्नर नहीं लगा है तो वो वाहन कानून तोड़ रहा है और आपकी जान जोखिम में डाल रहा है। सार्वजनिक सेवा वाहनों में पैनिक बटन लगा होना चाहिए। मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 215 बी के तहत एक राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड होना चाहिए।