पुलिस सूत्रों का कहना है कि पहली चार्जशीट में शैलेंद्र के साथ
उसके नौकर-चाकरों को ही आरोपी बनाया जाएगा। एसआईटी को अभी तक की जांच
पड़ताल में पता चला है कि शैलेंद्र की जालसाजी के खेल में इनका भी रोल
रहा है। पुलिस को जानकारी मिली है कि उसके एक नौकर के नाम करोड़ों की
जमीन है। पुलिस का मानना है कि शैलेंद्र ने अपनी काली कमाई से ही उसके नाम
जमीन करवाई है। एसआईटी ने जालसाज के 17 बैंक खाते खंगाले थे। इनमें खास रकम
नहीं मिली थी, जबकि जालसाजी की रकम करोड़ों में बताई जा रही है।
अब
नौकरों के खाते भी चेक किए जा रहे हैं। शक है कि शैलेंद्र ने उनके नाम खाते
खुलवाकर इनमें पैसा जमा न कर दिया हो। एक नौकर को शैलेंद्र का बेहद खास
बताया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि इससे पूछताछ में बड़े राज खुल सकते
हैं। इनसे अभी अलग अलग पूछताछ की जा रही है। इसके बाद इनका आमना सामना भी
कराया जाएगा। हालांकि शैलेंद्र अग्रवाल को पुलिस के 14 गनर मिले हुए थे
लेकिन इनसे कोई पूछताछ नहीं की जा रही है।
उधर, इस केस में सीबीआई
जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई अब जुलाई के पहले सप्ताह में
होगी। यह जानकारी सेंटर फोर सिविल लिबर्टीज की अधिवक्ता नूतन ठाकुर ने
ई-मेल के माध्यम से दी है। उन्होंने बताया कि इस मामले में दो पूर्व डीजीपी
एसी शर्मा और एएल बनर्जी समेत तमाम आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की भूमिका
के संबंध में बुधवार को हाईकोर्ट की लखनऊ खण्डपीठ में जस्टिस एसएन शुक्ला
और जस्टिस प्रत्युष कुमार की बेंच के सामने हुई। राज्य सरकार की ओर से अपर
महाधिवक्ता बुलबुल गोदियाल ने पीआईएल की पोषणीयता पर आपत्ति की। नूतन ठाकुर
ने बताया कि उन्होंने प्रतिवाद करते हुए मामले में अविलंब सुनवाई की जरूरत
बताई। कोर्ट ने कहा कि मामले को अविलंब सुनना जरूर नहीं है। इसके बाद
जुलाई के प्रथम सप्ताह में सुने जाने के आदेश दिए।
रिश्तेदारों को भी फिलहाल राहत
शैलेंद्र
के खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी की 29 एफआईआर में आधी से ज्यादा में उसके
परिवारीजन और रिश्तेदार भी नामजद हैं। लेकिन पहली चार्जशीट में इनके नाम भी
शामिल नहीं किए जाएंगे। इनकी गिरफ्तारी भी नहीं की गई है। पुलिस सूत्रों
का कहना है कि इनकी भूमिका की जांच अभी नहीं की जा रही है।