दरोगा के बेटे की अय्याशी ने उसे चोर बना दिया। जेब में एक पैसा न बचने पर वह दिनदहाड़े सदर कोतवाली के मालखाना में चोरी करने पहुंच गया। हालांकि ताला खोलते समय गारद की नजर पड़ी तो रंगेहाथ पकड़ लिया गया। उसके बाद चाबी भी बरामद हुई। हेकड़ी दिखाने पर कोतवाली पुलिस ने उसका चालान कर दिया।
सुभाषनगर के विवेक विहार कॉलोनी निवासी दरोगा वेद प्रकाश अग्निहोत्री 2006 से सदर मालखाना प्रभारी हैं। उनका छोटा बेटा अंकित अग्निहोत्री नोएडा में टीवी चैनल में नौकरी करता है। बुधवार को करीब साढ़े ग्यारह बजे अंकित मालखाने की चाबी लेकर पहुंच गया। उसने मालखाना खोलने का ताला खोलने की कोशिश की तो वहां मौजूद गारद के सिपाहियों ने उसे पकड़ लिया। चाबी छीनने पर अंकित सिपाहियों से भी भिड़ गया। मालखाना प्रभारी धौंस दिखाई तो गारद के सिपाहियों ने चीता मोबाइल को बुला लिया। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक ने अंकित से पूछताछ करने के बाद आला अफसरों को घटना की जानकारी दी। उधर गारद से सिपाही की तरफ से उन्हें तहरीर भी दे दी गई। वेदप्रकाश ने एसएसपी धर्मवीर यादव से मिलकर अपना दर्द सुनाया तो उन्होंने उन्हें बख्श दिया। एसएसपी की हरीझंडी मिलने पर अंकित के खिलाफ धारा 109 के तहत कार्रवाई करके चालान कर दिया गया। एसपी सिटी राजीव मल्होत्रा ने बताया कि आरोपी को जमानत मिल गई है।
मकान का किराया देना था इसलिए पहुंचा
अंकित ने पुलिस को बताया कि नोएडा में वह किराए के मकान में रहता है। छह हजार रुपये उसे किराए के लिए चाहिए थे। मकान मालिक ने किराए के बदले उसकी बाइक रख ली थी। घर वाले उसे रुपये नहीं दे रहे थे इसलिए वह गुस्से में मालखाने की चाबी लेकर आ गया था। मालखाने के ताले में चाबी लगाई ही थी कि पुलिस ने उसे पकड़ लिया।
करोड़ों की संपत्ति रहती है मालखाने में
सदर मालखाने में जिले भर से केस प्रॉपर्टी का सामान आकर जमा होता है। यहां लाखों रुपये केस रखा रहता है। इसके अलावा रायफल, बंदूक, तमंचे आदि तमाम तरह से असलहे, सोने के जेवर भी मालखाने में लाकर रख दिए जाते हैं। पिता सदर मालखाने के प्रभारी हैं, इसलिए अंकित को वहां के बारे में सब जानकारी थी।
दरोगा ने मालखाने पर ही पीटा
अंकित के मालखाना खोलने की कोशिश करने की सूचना मिलते ही दरोगा जी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने जाते ही अंकित को पकड़कर मारपीट शुरू कर दी। कहने लगे उनकी नौकरी में आज तक दाग नहीं लगा। तूने मुझे जेल भिजवाने का काम किया है। मालखाने के कुछ इधर-उधर हो गया होता तो नौकरी तो जाती ही जेल भी जाना पड़ता।