शैलेंद्र अग्रवाल की धोखाधड़ी के शिकार हुए शहर के तकरीबन 250 लोगों ने
दो दिन पहले पंचायत की। इसमें धोखाधड़ी के मुकदमे दर्ज कराने वाले 28
व्यापारियों के साथ ही वे लोग भी शामिल थे, जिनका पैसा शैलेंद्र ने हड़प
लिया मगर वे मुकदमे दर्ज नहीं करा सके हैं। व्यापारियों की मानें तो
शैलेंद्र ने आगरा के लोगों से तकरीबन 500 करोड़ रुपये हड़पे हैं।
व्यापारियों का कहना है कि धोखाधड़ी के इस खेल में शैलेंद्र के साथ उसके
परिवारीजन और ससुरालीजन भी शामिल रहे हैं। यही कारण है कि वे उसे बचाने के
लिए हर तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। अभी तक 26 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं,
इसके बाद भी पुलिस ने केवल एक दफा रिमांड पर लेकर पूछताछ की है।
व्यापारियों
ने आशंका जताई है कि शैलेंद्र और उसके संपन्न रिश्तेदार लखनऊ से मुकदमों
की जांच ट्रांसफर नहीं करा लें। पीड़ित व्यापारियों का आरोप है कि शैलेंद्र
ने पेशी पर आने पर व्यापारियों से कहा है कि वह अपनी जांच किसी दूसरे जिले
में ट्रांसफर कराकर जमानत करा लेगा, लेकिन किसी को पैसा नहीं लौटाएगा।
व्यापारियों ने शैलेंद्र के साथ नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी और मुकदमों
में चार्जशीट दाखिल करने की मांग की है। पंचायत में मनोज गोयल, रवि गुप्ता,
रवि बंसल, मुकेश अग्रवाल, विनय बंसल, मुकेश अग्रवाल, सुरेशचंद्र अग्रवाल,
नीतेश अग्रवाल, हरिबाबू शर्मा, रिंकेश अग्रवाल, संजय अग्रवाल, घनश्याम दास,
देवेंद्र गर्ग, जितेंद्र चौबे आदि मौजूद रहे।
करोड़ों की संपत्ति को जब्त किया जाए
व्यापारियों
का कहना है कि शैलेंद्र और उसके परिवारीजनों की करोड़ों की संपत्ति है।
इनमें मथुरा, आगरा और छिबरामऊ में दस कोल्ड स्टोरेज, 15 फारच्यूनर
गाड़ियां, चार ऑडी गाड़ी हैं। आगरा, मथुरा के अलावा महाराष्ट्र के
कोल्हापुर में करोड़ों की अचल संपत्ति है। होटल और रेस्टोरेंट हैं।
व्यापारियों का कहना है कि उसकी संपत्तियों को जब्त किया जाए, ताकि
पीड़ितों को रकम वापस कराई जा सके।