शिकायत मिलने पर जेल अधीक्षक ने बंदीरक्षकों की क्लास लगाई
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केंद्रीय कारागार में पीसीओ जरूर खुल गए हैं लेकिन यह अभी शोपीस बने हुए हैं। पोस्टपेड कनेक्शन की बाध्यता के कारण कैदी अपनों से बात नहीं कर पा रहे हैं। जेल प्रशासन का कहना है कि कैदियों के परिवारीजनों के नंबरों का सत्यापन के बाद ही बात करने दी जाएगी।
बता दें, सालों से जेल में सजा काट रहे कैदियों की अपनों से बात कराने के लिए पीसीओ की व्यवस्था की गई है। इसके लिए केंद्रीय कारागार में दो फोन लगाए गए हैं। जेल प्रशासन के मुताबिक, सुरक्षा कारणों से पोस्टपेड कनेक्शन पर ही बात कराने का नियम है। प्रीपेड कनेक्शन वालों की अभी बात नहीं कराई जा रही है। इससे कैदियों की दिक्कतें बढ़ गई हैं। ज्यादातर कैदियों के परिवारीजनों के पास यह कनेक्शन नहीं हैं।
यही वजह है कि फोन लगने के एक सप्ताह बाद भी किसी भी कैदी की अपनों से बात नहीं हो सकी है। जेल अधीक्षक ने बताया कि कैदी जो नंबर दे रहे हैं, उनका सत्यापन कराया जा रहा है। इसके बाद ही उनकी बात कराई जाएगी। इसके लिए कैदियों के परिवारीजनों के पास पोस्टपेड सिम होना जरूरी है।
जमानत के चार माह बाद रिहा हो सका कैदी
केंद्रीय कारागार में बंद 67 साल के इस्लाम की जमानत हाईकोर्ट से हो गई थी मगर, परिवारीजनों के पैरवी न करने के कारण उनकी रिहाई नहीं हो पा रही थी। तीन जुलाई को कव्वाली के दौरान इस्लाम ने अपनी समस्या जेल अधिकारियों और हम संस्था के सामने रखी थी। इसके बाद हम संस्था ने प्रयास किया। उसके मुरादाबाद निवासी बहनोई खलील से फोन पर बात की। इसके बाद ही इस्लाम की नौ सितंबर को रिहाई हो सकी। इस दौरान संस्था की ओर से कैदी को सहायता राशि भी दी गई। हम संस्था के विक्रम शुक्ला ने बताया कि कैदी की जमानत होने के बावजूद रिहाई होने में चार महीने से ज्यादा का समय लग गया।