भरतपुर हाउस गोलीकांड में जल्द से जल्द फोरेंसिक साक्ष्य जुटाने की कोशिश में लगी पुलिस को जोर का झटका लगा है। पुलिस ने विधि विज्ञान प्रयोगशाला में जो नमूने भेजे थे, उन पर अभी तक परीक्षण शुरू ही नहीं हुआ है।
हैरानी की बात यह है कि पुलिस अफसरों की पैरवी में कमजोरी के चलते लैब में केस प्राथमिकता पर नहीं लिया गया है। अगर, यही हाल रहा तो रिपोर्ट आने में एक साल से भी ज्यादा का समय लग सकता है। ऐसे में पुलिस के लिए चार्जशीट दाखिल करना भी आसान नहीं होगा।
20 जून की दोपहर जूता कारोबारी राजकुमार लालवानी की कोठी में हुए गोलीकांड में राजकुमार की मौत हो गई थी। उनसे मिलने आए सराफ संजीव रस्तोगी की पीठ में दो गोली लगी थी। संजीव को उनका ड्राइवर रवि उठाकर ले गया था। राजकुमार की हत्या में संजीव, रवि और संजीव के दोस्त डिब्बा कारोबारी स्वदेश वर्मा उर्फ गागा को आरोपी बनाया गया।
पुलिस ने फोरेंसिक साक्ष्य के लिए संजीव और राजकुमार के लाइसेंसी रिवाल्वर बेलेस्टिक परीक्षण के लिए भेजे। राजकुमार की पीठ में धंसी दोनों बुलेट भी भेजी गईं। इसके अलावा राजकुमार, संजीव और रवि के हाथों से लिए गए गन शॉट रिजिड्यू (जीएसआर) भेजे गए।
पुलिस फोरेंसिक रिपोर्ट जल्द से जल्द चाह रही थी, लेकिन प्लान फेल हो गया है। लैब के सूत्रों ने बताया कि इस मामले के नमूने सामान्य केस की तरह जमा कराए गए हैं। केस को प्राथमिकता पर लेने के लिए किसी अफसर ने न फोन किया है और न पत्र लिखा है। बता दें, प्रदेश में बेलेस्टिक परीक्षण लैब सिर्फ यही है। यहां लंबित मामले ज्यादा हैं। अगर पैरवी न की जाए तो केस को नंबर पर आने में साल भर तक लग जाता है। अगर परीक्षण तुरंत शुरू कर दिया गया होता तो अब तक रिपोर्ट आ गई होती।
विधि विज्ञान प्रयोगशाला में खत भेजकर इस केस को प्राथमिकता पर लेने के लिए कहा गया है। जल्द ही स्थिति मालूम की जाएगी। जरूरत पड़ी तो रिमाइंडर भेजा जाएगा।
- सुशील घुले ( एसपी सिटी)