पंचायत चुनाव के पहले चरण में भले ही बवाल कम हुआ हो, लेकिन अफसरों को
टेंशन ज्यादा हो गई है। दरअसल, दूसरे, तीसरे और चौथे चरण में संवेदनशील
गांवों की संख्या ज्यादा है। बवाल की आशंका भी पहले से ज्यादा है। पुलिस का
प्लान खतरा देखकर ही बनाया जा रहा है। सबसे ज्यादा जोर इस पर है कि छोटी
सी घटना को भी बड़ी गंभीरता से लिया जाए ताकि बवाल बढ़ने न पाए।
पहले चरण में एत्मादपुर और बरहन में बवाल की छिटपुट घटनाएं हुई थीं। दूसरे, तीसरे और चौथे चरण के मतदान में बवाल की ज्यादा संभावना है। इसके मद्देनजर पुलिस प्रशासनिक अधिकारी टेंशन में हैं। छुटपुट घटनाओं की सूचना पर भी तत्काल एक्शन लेने के निर्देश दिए गए हैं। दूसरे चरण का मतदान 15 अक्तूबर को होगा। इसमें सैंया, जगनेर, खेरागढ़ और अकोला ब्लाक हैं।
जानकारी के मुताबिक, अकोला ब्लाक के कई बूथ संवेदनशील है। यहां पर दो जाति विशेष के लोगों का प्रभाव है। इस कारण जातीय संघर्ष की आशंका है। इसके बाद खेरागढ़ और सैंया का नंबर आता है।
पुलिस लाइन में मंगलवार को ब्रीफिंग में चुनाव ड्यूटी में लगे अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे मतदान वाले दिन सुबह से ही बूथों पर भ्रमणशील रहेंगे। जिन बूथों पर विवाद की आशंका होगी, उसका निर्धारण दोपहर 12 बजे तक करना होगा। इसके बाद जोनल और सेक्टर मजिस्ट्रेट इन बूथों पर खुद मौजूद रहेंगे। आपात स्थिति में अधिकारी तुरंत अतिरिक्त फोर्स की मांग करेंगे। इसके बाद रिजर्व बल को वहां पर भेज दिया जाएगा।
--। अकोला ब्लॉक के कई गांवों के बूथ पर जातीय संघर्ष का खतरा
--। खैरागढ़ के कई बूथों पर दबंगों के कब्जा करने की आशंका
--। सैंया में भी कई बूथ अतिसंवेदनशील हैं, रहना होगा अलर्ट
:: 12 बजे तक देनी होगी रिपोर्ट
एसएसपी
डाक्टर प्रीतिंदर सिंह ने पुलिस को निर्देश दिए हैं कि वोटिंग वाले दिन 15
अक्तूबर को दोपहर 12 बजे तक यह तय कर लिया जाए कि यहां ज्यादा फोर्स की
जरूरत है और कहां कम? जहां सुबह थोड़ा सा भी हंगामा हो, वहां की सुरक्षा पर
फोकस किया जाए।
:: निजी वाहनों का प्रयोग न करें
चुनाव ड्यूटी में
लगे अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं कि वे निजी वाहनों से न
चलें। चुनाव ड्युूटी पर वही गाड़ी इस्तेमाल की जाए तो उन्हें इसके लिए
मुहैया कराई गई है।