एत्माद्दौला में मुगलकालीन मकबरे का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। यह मकबरा बादशाह जहांगीर के बेटे सुल्तान परवेज का बताया जाता है। यहां एक सप्ताह से हरे पेड़ों को काटा जा रहा था। क्षेत्रीय लोगों को जब यहां कब्जे की कोशिश का पता चला तो उन्होंने मजदूरों को खदेड़ दिया। शिकायत के बाद बुधवार को अफसरों ने मौैका मुआयना किया। मामले की जांच कराई जा रही है।
एत्माद्दौला स्थित दरगाह शरीफ दादा पीर के सज्जादानशी दादा हुजूर ने बताया कि दरगाह से करीब 500 मीटर की स्थित सुल्तान परवेज का मकबरा देखरेख के अभाव में जीर्ण-शीर्ण हो गया है। उनके मुताबिक वहां कब्जे की नीयत से कोई भूमाफिया एक हफ्ते से मजदूरों से सफाई करा रहा है। मजदूरों ने दर्जनों हरे पेड़ भी काट दिए।
इलाके के लोगों से मिली जानकारी पर उन्होंने मकबरे में जाकर देखा तो पिछले हिस्से में कई हरे पेड़ों को काटा पाया। काफी ऊंचाई पर होने के कारण सड़क से मकबरे के ऊपरी हिस्सा दिखाई नहीं देता। भूमाफिया ने इसी का फायदा उठाया। दादा हुजूर ने कहा कि ऐतिहासिक महत्व की इस धरोहर को पुरातत्व विभाग ने तो संरक्षित नहीं किया, पर इसे वे किसी टूटने नहीं देंगे। सज्जादानशीं ने कमिश्नर और डीएम से मामले की शिकायत की। आशंका जताई कि मकबरे के गुंबद को भी गिराया जा सकता है।
बुधवार को अपर नगर मजिस्ट्रेट अरुण कुमार के साथ तहसील की टीम और पुलिस मौके पर पहुंची। अरुण कुमार ने बताया कि कुछ पेड़ आंधी में उखड़े थे, कुछ काटे गए हैं। स्मारक एएसआई द्वारा संरक्षित नहीं है। राजस्व रिकार्ड में आबादी क्षेत्र में दर्ज है। कब्जे के प्रयास की शिकायत की जांच कराई जा रही है।