आगरा में ऑनलाइन लाटरी चलने का सबसे ज्यादा अड्डा मिला है। एसटीएफ की कार्रवाई में आगरा में 15 सेंटर चलते मिले हैं। इन सभी सेंटरों के संचालकों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
जबकि सुल्तानपुर और इलाहाबाद में छापामारी में दो सेंटर और संचालक पकड़े गए हैं। ये लोग ऑनलाइन क्विज गेम के नाम पर ऑनलाइन लाटरी रैकेट चला रहे थे।
इस रैकेट में विशाल सैनी पुत्र स्व. विनोद कुमार निवासी न्यू शाहगंज, थाना शाहगंज, आगरा जो वर्तमान में मनोरंजन कर विभाग आगरा में क्लर्क के पद पर नियुक्त है। वह भी पकड़ा गया है।
दर्ज कराया था केस
बता दें कि एसटीएफ के अपर पुलिस अधीक्षक त्रिवेणी सिंह ने फोन पर बताया कि नोएडा में गत 17 जनवरी को बृजेश कुमार यादव ने धोखाधड़ी और जालसाजी का केस दर्ज कराया था। उनसे क्विज गेम के नाम पर दो लाख की ठगी की गई थी।
एसटीएफ इसकी जांच कर रही थी। इसी दौरान हरीपर्वत में ऑनलाइन क्विज गेम के नाम पर ऑनलाइन लाटरी का भंडाफोड़ हुआ था। नौ लोग गिरफ्तार किए गए थे। ये लोग मनोरंजन कर विभाग के क्विज गेम का लाइसेंस लेकर यह गोरखधंधा चला रहे थे।
एसटीएफ को पता चला कि ऑनलाइन लाटरी की खरीद फरोख्त का रैकेट बडे़ स्तर पर संचालित किया जा रहा है, जिसमें फर्जी नाम, पते पर वेबसाइट बनाकर खेल किया जाता है।
एसटीएफ के एएसपी ने बताया कि इसकी होस्टिंग विदेशों के सर्वर पर थी। इसके साक्ष्य मिलने केबाद शनिवार को छापामारी की गई। मौके से ही आरोपी पकड़ लिए गए।
सर्वर का करता है रखरखाव
इस ऑनलाइन सट्टेबाजी का सरगना संजय जायसवाल पुत्र मोहन लाल जायसवाल है, जो एडमिन के रूप में सर्वर का रखरखाव करता था। इसके द्वारा इस तरह के कई दर्जन ऑनलाइन लाटरी संचालन केंद्र आगरा, सुल्तानपुर, इलाहाबाद, ग्वालियर, भोपाल, हल्द्वानी, हरिद्वार में चलाये जा रहे थे।
परिणाम सुबह 10.00 बजे से लेकर रात सात बजे तक प्रतिघन्टे के हिसाब से, सिल्वर, गोल्ड, डायमण्ड श्रेणियों के रूप में दिए जाते थे। 12 से लेकर 150 रुपये तक दांव पर लगाए जाते थे। लॉटरी आने पर कई गुना रकम का लालच दिया जाता था।
मनोरंजन कर विभाग ने दिखावे के लिए क्विज गेम के सबी लाइसेंस कागजों में निरस्त कर दिए थे लेकिन मौकेपर इनकी आड़ में लॉटरी का खेल चल रहा था। अधिकारियों ने सत्यापन ही नहीं किया, वरना यह गोरखधंधा पहले ही पकड़ा जाता है। विभाग का लिपिक इसमें शामिल मिला है। अब अफसरों की भूमिका की भी जांच हो सकती है।