1.25 करोड़ की धोखाधड़ी के संगीन मामले में फंसे बिल्डर को बचाने के लिए पुलिस के अफसरों ने कानून को ही ताक पर रख दिया। उसके गिरफ्तारी वारंट होने के बावजूद दो अधिकारियों ने उसे अपनी बगल में बैठाया। उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने वाले दूसरे बिल्डर के साथ उसकी अपनी दफ्तर में मीटिंग कराई। और फिर बिचौलिए की भूमिका निभाकर 44 लाख में समझौता भी करा दिया। इतना ही नहीं। आयकर कानून की धज्जियां उड़ाते हुए उससे 11 लाख रुपये कैश दिलवा दिया। दूसरी ओर लिखा-पढ़ी में उसके घर दबिश देने से लेकर कुर्की के प्रयास किए जाने का नाटक भी चलता रहा।
अफसरों की इस मेहरबानी से जेल जाने से बचा यह बिल्डर है रीयल एस्टेट कंपनी निखिल होम्स में पार्टनर शैलेंद्र गर्ग। उसके मैनेजर अभिषेक शर्मा ने गुरुवार दोपहर बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस करके दावा किया कि इस मामले में दो अधिकारियों के दफ्तर में मीटिंग में हुई। इसके बाद 23 जुलाई को अधिकारी के दफ्तर में उनके सामने ही समझौता हुआ।
इसमें शैलेंद्र ने प्रतिष्ठा की खातिर 44 लाख देने की बात कही। इसके बाद गुरुवार शाम को 11 लाख कैश आलोक सिंह को दिया। 33 लाख ड्राफ्ट के माध्यम से शुक्रवार को दिया गया। गौरतलब है कि रियल एस्टेट कंपनी आरएसजी के डायरेक्टर आलोक सिंह ने ही शैलेंद्र और उनके पार्टनर पवन सिंह खिरवार के खिलाफ 1.25 करोड़ की धोखाधड़ी का केस 15 मई को हरीपर्वत थाना में दर्ज कराया था। अब सवाल यह है कि क्या पुलिस अधिकारी को यह अधिकार है कि वह किसी फरार आरोपी को अपने दफ्तर में बैठाकर धोखाधड़ी के मामले में बिचौलिया बनकर समझौता कराए ?
सीओ हरीपर्वत के मुताबिक ,शैलेंद्र गर्ग और पवन सिंह खिरवार के कोर्ट से वारंट जारी हैं। सवाल यह भी है कि जब पुलिस अधिकारी उसके बगलगीर थे, तो उसकी गिरफ्तारी के प्रयास में दबिश का नाटक क्यों किया गया ?
दूसरा, सवाल यह है कि क्या बगैर बैंकिंग सिस्टम इस्तेमाल किए 11 लाख रुपये का नगद ट्रांजिक्शन किया जाना कानूनी तौर पर सही है? क्या आयकर कानून इसकी इजाजत देता है?
:: पुलिस ने बड़ी गलती की
--। जिस आरोपी के वारंट जारी हो चुके हैं, पुलिस का काम उसे गिरफ्तार करके कोर्ट के सामने पेश करना है, पास में बिठाना बड़ी गलती है - अचल कुमार शर्मा ( सीनियर एडवोकेट )
:: 20 हजार रुपये से अधिक के ट्रांजिक्शन के लिए बैंकिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाना अनिवार्य है। ज्यादा कैश के लेन-देन पर आयकर विभाग इस पर 100 फीसदी तक पेनाल्टी लगा सकता है- रुचि अग्रवाल ( टैक्स सलाहकार )