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तीस मुकदमों पर भी नहीं खुली शैलेंद्र की हिस्ट्रीशीट

Wed, 17 Jun 2015 02:12 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला आगरा
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जालसाज के लिए सबसे बड़ी राहत तो यह है कि पुलिस ने उससे कोई रिकवरी नहीं की है। अगर पुलिस का इरादा सख्ती करने का होता तो उसके पूरे रैकेट पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई कर उसकी संपत्ति जब्त कर ली गई होती।
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एक मई को जेल जाने से पहले 14-14 गनर लेकर लग्जरी गाड़ियों के काफिले में पूरी हनक के साथ चलते रहे इस फ्रॉड पर हत्या का एक केस पहले से दर्ज है जबकि धोखाधड़ी के 29 मामले एक मई के बाद दर्ज हुए हैं। आमतौर पर किसी शख्स पर संगीन धाराओं के पांच-छह केस दर्ज होते ही पुलिस इसके जुर्म की कुण्डली बनाना शुरू कर देती है, ताकि उसके एक एक गुनाह का हिसाब किताब करने में किसी तरह की कोई चूक न हो।
पेशेवरअपराधियों के मामलों में तो साक्ष्य मिलते ही तीन-चार केस पर भी हिस्ट्रीशीट खोल दी जाती है लेकिन इस मामले में सारे नियम कायदे ताक पर रख दिए गए हैं। पुलिस के इस रवैय्ये से तो यही लगता है कि शासन तक में हलचल मचा देने वाले इस प्रकरण में सिर्फ आला अफसरों को ही नहीं, बल्कि काफी हद तक शैलेंद्र को भी बचाने की तैयारी चल रही  है।
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उसके खिलाफ कॉल स्पूफिंग से लेकर एसएमएस पर दरोगाओं की ट्रांसफर पोस्टिंग की बोली लगाने तक के साक्ष्य मिल चुके हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि उसके खिलाफ चार्जशीट तो दाखिल की जाएगी लेकिन कोर्ट के सामने मजबूत साक्ष्य नहीं रखे जाएंगे। इसका उसे बड़ा फायदा मिल सकता है। उसके साथ उसके रिश्तेदार भी नामजद हैं लेकिन पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी करना अभी तक जरूरी नहीं समझा है।

 तो खुद वादी क्यों नहीं बन जाती पुलिस?
शैलेंद्र जालसाजी प्रकरण में जांच के घेरे में आए वर्तमान और पूर्व अधिकारियों के नाम चार्जशीट में न रखे जाने के पीछे उनके खिलाफ मुद्दई न मिलने की मजबूरी बताई जा रही है। लेकिन क्या वास्तव में पुलिस इतनी मजबूर है? क्या कोई और तरीका नहीं अफसरों को आरोपी बनाने का? पूर्व डीजीसी अशोक गुप्ता का कहना है कि पुलिस खुद वादी क्यों नहीं बन जाती है? अगर कॉल डिटेल, एसएमएस, बैंक से कैश ट्रांजिक्शन के साक्ष्य मिल चुके हैं, तो और क्या चाहिए? ऐसे मामलों में पुलिस को मुख्य आरोपी का रिमांड लेकर उससे मिली जानकारी पर जांच करके साक्ष्य जुटाने होते हैं।

सीबीआई जांच पर सुनवाई आज

शैलेंद्र अग्रवाल जालसाजी प्रकरण में सीबीआई जांच की मांग को लेकर सेंटर फोर सिविल लिबर्टीज की अधिवक्ता नूतन ठाकुर की जनहित याचिका पर हाईकोर्ट की लखनऊ खण्डपीठ में आज सुनवाई होगी। नूतन ठाकुर ने फोन पर बताया कि यह सुनवाई जस्टिस एसएन शुक्ला और जस्टिस प्रत्यूष कुमार की बेंच के सामने होनी है। याचिका में कहा गया है कि इस प्रकरण में सरकार के वरिष्ठ और प्रभावशाली लोगों का नाम आने के चलते पुलिस से निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती है।

शैलेंद्र केस में अभी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं, मुकदमे दर्ज हुए ज्यादा दिन नहीं हुए हैं, इसलिए अभी हिस्ट्रीशीट नहीं खुल पाई है - राजेश डी. मोदक (एसएसपी, आगरा )
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