लंगड़े की चौकी स्थित नगला छिद्दा में शुक्रवार सुबह जूता कारीगर सत्यपाल (32), उसकी पत्नी ज्योति (30) और दुधमुंहे बेटे प्रतीक उर्फ शिवम (आठ माह) के शव घर में मिलने से सनसनी फैल गई। मां-बेटे के शव चारपाई पर पड़े थे, जबकि सत्यपाल की लाश पंखे के कुंडे से लगाए गए फांसी के फंदे पर लटकी थी। पुलिस का मानना है कि उसने दोनों की हत्या करने के बाद आत्महत्या की है। दीवार पर उसका सुसाइड नोट भी मिला है। पुलिस ने उसके ससुरालियों पर उसे आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज कर दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।
मूलरूप से बड़ी बसई, फतेहाबाद निवासी दाताराम का बेटा सत्यपाल नगला छिद्दा में अशोक टेंट हाउस वालों के घर में दो साल से किराए पर रहता था। वह खंदारी स्थित जूता फैक्ट्री में छपाई का काम करता था।
शुक्रवार सुबह 7.15 बजे उसकी बेटी पलक उर्फ गुनगुन ( दो ) के रोने की आवाज सुनकर पड़ोसियों ने गली में तीन मकान दूर रहने वाले सत्यपाल के भाई केदार को बुलाया। उसने अंदर झांककर देखा तो अंदर भाई फंदे पर लटका था।
लोगों ने धक्का देकर दरवाजा खोला। चारपाई पर ज्योति और शिवम के शव पड़े थे। शिवम के मुंह और नाक से झाग आ रहे थे। पास बैठी पलक रो रही थी। सत्यपाल की तलाशी में पिता के नाम लिखा पत्र मिला। दीवार पर स्केच से सुसाइड नोट लिखा था। उसने अपने इस कदम के लिए सास गुड्डी, ममिया ससुर गौतम, मुसिया सास मुन्नी, साला शेखर, मनोज को जिम्मेदार ठहराया है। उसके भाई केदार की ओर से केस दर्ज कर पुलिस ने गौतम और मुन्नी को गिरफ्तार कर लिया है। एसओ हरीपर्वत का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह मामला ससुराल के उत्पीड़न से तंग आकर सत्यपाल द्वारा पत्नी और बच्चे की गला दबाकर हत्या कर आत्महत्या का लग रहा है। ज्योति और शिवम के गले पर निशान थे।
मैं तेरी गुनगुन को एचआईवी का मरीज बना दूंगा....
आगरा। तुम मुझसे अपने आठ हजार रुपये मांगना बंद करो, वरना तुम्हारी बेटी को एचआईवी का मरीज बना दूंगा, फिर उसके इलाज में तुम्हारे सारे पैसे खर्च हो जाएंगे.... सत्यपाल को यह धमकी मिली अपने ही साले शेखर से। माना जा रहा है कि इस धमकी ने उसके दिल को ऐसा धक्का दिया कि वह मरने-मारने पर उतारू हो गया। वह अपनी बेटी पलक उर्फ गुनगुन को बहुत प्यार करता था। शायद इसीलिए उसे जीवित छोड़ दिया। सत्यपाल ने अपने पिता के नाम छोड़े पत्र में लिखा है, चाचा मुझे माफ कर दो। मैं रोजाना के दबाव से तंग आ गया था। मुझे बहुत धमकी दी जा रही थी। शेखर बीमार था तब आठ हजार रुपये लिए। देने का नाम आते ही कहने लगा तेरी लड़की को एचआईवी का मरीज बना दूंगा, फिर तेरे सारे पैसे खर्च हो जाएंगे। वह अपने पिता को चाचा कहता था।
‘पापा ने मम्मी को मारा, फिर वो लटक गए’
आगरा। मासूम गुनगुन कमरे के अंदर लाशों के साथ पूरी रात रही। वह बहुत सहमी हुई है। जब भी कोई उससे पूछता तो एक ही बात कहती कि पापा ने मम्मी को मारा। फिर पापा लटक गए। इसके अलावा वह कुछ भी नहीं बोलती। वह मम्मी-पापा को बार-बार याद कर रही है।
सुसाइड नोट :
सेवा में श्रीमान, एसपी सिटी, आगरा। निवेदन है, मैं सुसाइड अपनी जिंदगी से तंग आकर कर रहा हूं। क्योंकि मैं अपनी सास गुड्डी, गौतम, मुन्नी, शेखर, मनोज के दबाव से कर रहा हूं। क्योंकि रोजाना मुझे यह परेशान करते थे कि तुझे पुलिस मेें पकड़वा देंगे। मैं सुबह नौ बजे कंपनी जाता शाम को नौ बजे आता था, आते ही क्लेश होता था। दिन प्रति दिन मुझे परेशान कर रहे थे।
दोनों की हत्या के कुछ देर बाद की आत्महत्या
पोस्टमार्टम रिपोर्ट : एसओ हरीपर्वत शैलेष सिंह ने बताया कि महिला और उसके बेटे की हत्या गला दबाकर की गई है। इसकी पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हुई है। अन्य कोई चोट के निशान नहीं मिला है। वहीं, सत्यपाल की मौत का कारण भी हैंगिंग आया है। उसने पूरे घटनाक्रम को गुरुवार रात तकरीबन 12 से एक बजे के बीच अंजाम दिया था।
नगला छिद्दा में मचा कोहराम
मोहल्ले में तीन मौतों से कोहराम मच गया। मृतक सत्यपाल की पड़ोसी महिलाओं ने बताया कि देर रात 11 बजे तक ज्योति, पति और बच्चों के साथ देवी माता के पंडाल में मौजूद थी। भजनों पर महिलाओं ने डांस भी किया था। रात होने के कारण चारों सोने चले गए। जब सुबह घटना की जानकारी हुई तो शवों को देख महिलाएं रोने लगीं।
चारपाई की निबाड़ से लगाई फांसी
सत्यपाल ने चारपाई की निबाड़ से फांसी लगाई थी। चारपाई को सीधा करने के बाद उसने निबाड़ काटी थी।
हैंडराइटिंग की मैच
पुलिस ने सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग मैच करने के लिए उसके दस्तावेज खंगाले। एक बैग में उसके शैक्षिक प्रमाण पत्र मिल गए। इसमेें एक कापी और अन्य कागजात भी थे, जिससे उसकी राइटिंग को मैच किया गया।
प्रशिक्षु आईएएस ने की पंचनामा की कार्रवाई
महिला सहित तीन की मौत की जानकारी पर जिलाधिकारी ने मौके पर प्रशिक्षु आईएएस नेहा जैन को भेजा। उन्होंने पंचायतनामा की कार्रवाई कराई।
शादी के एक साल बाद ही शुरू हुआ झगड़ा
हिंडौन सिटी (राजस्थान) निवासी सौदान सिंह की बेटी ज्योति की शादी साढ़े तीन साल पहले बड़ी बसई फतेहाबाद के सत्यपाल से हुई थी। सत्यपाल छह भाई और बहन में सबसे छोटा था। बीए पास करने के बाद उसने नौकरी की तलाश शुरू कर दी थी। मगर, गांव में नौकरी नहीं मिली। मृतक के भाई महेंद्र ने बताया कि शादी के एक साल बाद ही भाई काम की तलाश में आगरा आ गया।
बड़ा भाई केदार सिंह और महेंद्र भी नगला छिद्दा में रहने लगे। ज्योति को उनका घर पर आना बुरा लगता था। इस बात को लेकर दोनों के बीच आए दिन झगड़े हुआ करते थे। ज्योति अपनी हर बात मायके वालों को बताती थी। 10 दिन पहले (रविवार को) भी पति-पत्नी के बीच झगड़ा हुआ था। तब सास गुड्डी घर पर आई थी। परिवार के अन्य लोग भी साथ थे। सत्यपाल के पिता दाताराम भी पहुंचे। दोनों को समझाने के बाद ससुराल वाले चले गए।