फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

साइबर अपराध: हैकरों से सेवानिवृत्त कर्मचारियों का डाटा लेने की आशंका, 26 लाख रुपए बरामद नहीं कर सकी पुलिस

Tue, 08 Dec 2020 09:26 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला,आगरा

सार

  • रेंज साइबर सेल की टीम कर रही पड़ताल
  • बैंकों से भी जुटाई जा रही जानकारी 
विज्ञापन
डेमो - फोटो : डेमो
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों को ट्रेजरी अफसर बनकर कॉल करने वाले साइबर अपराधियों के बारे में बैंकों से भी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस यह भी पता करने में लगी है कि उन्होंने कर्मचारियों के मोबाइल नंबर और खातों की जानकारी कैसे ली? पुलिस को आशंका है कि दिल्ली में बैठे हैकरों ने डाटा दिया है। यह डाटा सिर्फ बैंक और ट्रेजरी के पास ही होता है।  
विज्ञापन


 
साइबर अपराधियों ने पिछले दिनों ट्रेजरी अफसर बनकर अग्निशमन विभाग के सेवानिवृत्त दरोगा के खाते से 26 लाख रुपये निकाल लिए थे। वह फिरोजाबाद के रहने वाले हैं। इसी तरह आगरा के सेवानिवृत्त एचसीपी के खाते से 96 हजार रुपये निकाले गए। अमेठी और फतेहपुर के सेवानिवृत्त कर्मियों के खातों में भी इसी तरह सेंध लगाई गई। इन मामलों की जांच रेंज साइबर सेल की टीम कर रही है। 


प्रभारी शैलेष सिंह ने बताया कि साइबर अपराधियों ने प्रदेश भर के सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों को कॉल किए थे। इनमें से चार के साथ ठगी की जानकारी मिल गई है। अभी कितने और लोगों को गैंग ने ठगी का शिकार बनाया? यह पता किया जा रहा है। सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के मोबाइल नंबर, खाता संख्या और किस मद में कितना पैसा आया? इस बात की जानकारी बैंक और ट्रेजरी में ही होती है।
विज्ञापन

 
विज्ञापन

साइबर अपराधी सेवानिवृत्त कर्मचारियों को कॉल करने के बाद इन सबके बारे में बताते हैं। इससे वह विश्वास करने लगते हैं। इस वजह से खातों के बारे में अन्य जानकारी देते हैं। पिन और ओटीपी भी बता बैठते हैं। आशंका है कि साइबर अपराधी हैकरों से यह डाटा ले रहे हैं। क्योंकि बैंकों और ट्रेजरी का डाटा केंद्रीय सिस्टम में होता है। हालांकि अभी यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है।

संभव है कि दिल्ली में सक्रिय कुछ हैकर्स साइबर अपराधियों को बैंक का डाटा उपलब्ध कराते हैं। ऐसे में टीम डाटा उपलब्ध कराने वाले हैकर्स के बारे में भी पता कर रही है। उधर, जिन बैंकों में रुपये गए हैं, उनके खातों का डाटा नहीं मिल सका है। बैंक के अधिकारियों को मेल किया गया है। उनसे जानकारी नहीं मिली है। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें