पिछले सालों में ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को प्रशासन से मुआवजे के रूप में मिले आर्थिक सहायता के चेक वितरण में राजस्व कर्मियों की घपलेबाजी सामने आई है। जिलाधिकारी के आदेश पर एडीएम वित्त एवं राजस्व ने एसटीएम को भेजे एक पत्र में ग्राम हंसेला के 67 किसानों से सात लाख 63 हजार तीन सौ रुपये वसूलने का आदेश दिया हैं। प्रशासन ने किसानों को नोटिस जारी कर दिया है। उजरई गांव के किसानों को भी नोटिस दिया गया है। इसके चलते किसानों में आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि इस फैसले को वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन किया जाएगा।
मार्च 2015 में ओलावृष्टि के चलते किसानों के खेतों में खड़ी गेहूं, आलू, सरसों की हजारों एकड़ फसलें बर्बाद हो गई थीं। तब प्रशासन के आदेश पर राजस्व विभाग की टीम ने सर्वे कर पीड़ित किसानों को मुआवजा दिलाने के लिए जिला प्रशासन को रिपोर्ट सौंपी थी। हंसेला के प्रधान सूरजमल का कहना है कि कुछ लोगों ने जिलाधिकारी से झूठी शिकायत कर आरोप लगाया था कि लेखपाल वीरपाल सिंह और किसानों की मिलीभगत के चलते गलत तरीके से मुआवजा वितरित किया गया है। जिलाधिकारी पंकज कुमार ने मामले की जांच कराना तक मुनासिब नहीं समझा और एडीएम वित्त एवं राजस्व को किसानों से मुआवजा वसूलने का आदेश पारित कर नोटिस जारी करा दिए। हंसेला के किसान तेजसिंह का कहना है कि लेखपाल ने सर्वे में गड़बड़ी की है। प्रशासन ने 22 हजार से 50 हजार रुपये तक की धनराशि वसूलने के लिए नोटिस जारी किए हैं। कुछ किसानों ने बताया कि सर्वे में गड़बड़ी की शिकायत पर जिलाधिकारी ने जांच के लिए तहसीलदार को नामित किया था लेकिन एक वर्ष बाद भी जांच और जांच टीम का पता नहीं चला। हालांकि उपजिलाधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर लेखपाल वीरपाल सिंह को निलंबित कर दिया गया था। बाद में उन्हें बहाल कर दिया गया। हंसेला के अमर सिंह, हरेन्द्र सिंह, आदिराम, चिरंजी, सूरजमल, भूरी सिंह, श्यामसुंदर, कलुआ, करतारी, गोपीचंद, वीरेन्द्र सहित 67 किसानों के खिलाफ वसूली नोटिस जारी किए गए हैं। उधर, उजरई के किसान देशराज सिंह, निहाल सिंह, अचल सिंह प्रधान, ब्रजकिशोर सहित दर्जन भर को नोटिस मिले हैं। किसानों में इसे लेकर भारी आक्रोश है। खबर है कि प्रशासन के खिलाफ किसान लामबंद होने लगे हैं। जल्द ही अछनेरा में एक महापंचायत कर आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी।