ट्रेजरी अफसर बनकर सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों के खाते से रकम पार करने वाले गिरोह ने पांच खातों और तीन ई वालेट का इस्तेमाल किया। इनमें रकम ट्रांसफर करने के बाद निकाल ली। अब पुलिस यह पता करने में लगी है कि आखिरी बार किस खाते में रकम गई? यह किसका है? इसके बाद झारखंड पुलिस की मदद से आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जाएंगे।
बालाजीपुरम निवासी सेवानिवृत्त एचसीपी नाहर सिंह के खाते से साइबर अपराधियों ने 96 हजार रुपये निकाल लिए थे। उन्हें ट्रेजरी अफसर बनकर कॉल किया गया था। इसके बाद खाते की जानकारी ली गई। उन्होंने रेंज साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई।
संबंधित खबर- यूपी: 40 सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों को 'जाल' में फंसाने को झारखंड में रची गई साजिश, जांच में हुआ खुलासा
पुलिस ने जांच शुरू कर दी। जिस नंबर से नाहर सिंह को कॉल आया और जिन खातों में रकम ट्रांसफर की गई, उनकी जांच की गई। साइबर अपराधियों ने 40 से अधिक सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों को कॉल किया था। इनमें फिरोजाबाद निवासी फायर सर्विस के उपनिरीक्षक श्रीकिशन के खाते से भी 26 लाख रुपये निकाले गए थे। इसके अलावा भी दो और सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों के खाते से रकम ट्रांसफर की गई है।
रेंज साइबर सेल के मुताबिक, जांच में पता चला है कि रुपये निकालने वाला झारखंड के जामताड़ा का गिरोह है। वह सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के नाम और नंबर की जानकारी वेबसाइट से लेकर कॉल कर रहे हैं। उन्हें ट्रेजरी अफसर बता रहे हैं। कर्मचारियों की रकम पांच बैंक खाते और तीन ई वालेट में गई थी। बैंकों से इनका स्टेटमेंट मंगवाया गया है। कुछ खातों की डिटेल मिल गई है। खातों में लाखों रुपये ट्रांसफर और निकाले गए हैं।
नक्सली इलाके में बैंक के खाते
पुलिस ने बताया कि खाते झारखंड, जालंधर, अहमदाबाद और वर्धमान की बैंक के हैं। झारखंड की बैंक नक्सली इलाके में हैं। यहां पर ही साइबर अपराधियों के कई गिरोह सक्रिय हैं, जो लोगों को कॉल करके झांसे में लेते हैं। पुलिस यह पता करने में लगी है कि आखिर में यह रकम किस खाते में गई? और कब-कहां से निकाली गई? खाते किसके हैं?
कई तरीके अपना रहे अपराधी
पुलिस ने बताया कि साइबर अपराधी लोगों को ठगने के लिए कई तरीके अपना रहे हैं। लोगों को कॉल करके बैंक अधिकारी बताते हैं। इस दौरान खाता और एटीएम कार्ड ब्लाक होने का झांसा देते हैं। इसके बाद खाते की जानकारी लेकर रकम पार करते हैं। इसी तरह इंश्योरेंस कंपनी का अधिकारी बनकर बीमा लाभ दिलाने का झांसा देते हैं। वहीं नौकरी और व्यवसाय दिलाने के नाम पर भी ठगी करते हैं।