आगरा के तुरकिया कांड के दोषी गंभीर सिंह की फांसी की सजा को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरकरार रखा है। उसने सगे भाई-भाभी और उनके चार मासूम बच्चों की निर्मम तरीके से गला काटकर हत्या कर दी थी।
हाईकोर्ट ने कहा कि जिस तरीके और जिस नीयत के साथ हत्याकांड को अंजाम दिया है, उससे जाहिर है कि अभियुक्त एक बर्बर हत्यारा है और ऐसे लोगों का जीवित रहना समाज के हित में नहीं है।
कोर्ट ने इसे रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस माना है। गंभीर सिंह को सेशन कोर्ट आगरा ने 20 मार्च 2017 को फांसी की सजा सुनाई थी। सजा का रेफरेंस हाईकोर्ट की अनुमति के लिए भेजा गया था। इसी के साथ अभियुक्त की अपील पर भी सुनवाई की गई।
न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति ओमप्रकाश की पीठ ने सरकारी अधिवक्ता और न्यायमित्रों को सुनने के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश आगरा के निर्णय को सही करार दिया है।
धारदार हथियार से की थी हत्या
घटना नौ मई 2012 की है। अछनेरा थानाक्षेत्र के तुरकिया गांव निवासी सत्यभान, उसकी पत्नी पुष्पा और चार बच्चों आरती, महला, गुड़िया और कन्हैया (सभी पांच वर्ष के आसपास की आयु के) की धारदार हथियार से गला काट कर हत्या कर दी गई थी।
गांव वालों से मिली सूचना के मुताबिक सत्यभान का छोटा भाई गंभीर सिंह, उसका दोस्त अभिषेक और बहन गायत्री मृतक के घर पर रुके थे और आठ मई की शाम को गांव के लोगों ने तीनों को बदहवास हालत में बाहर जाते देखा था।
महावीर की तहरीर पर पुलिस ने तीनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर नौ मई को ही गिरफ्तारी कर ली। उनकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त कुल्हाड़ी और खुखरी आदि हथियार बरामद हुए। सभी खून के निशान थे।
एक बीघा जमीन के लिए छह लोगों की हत्या
आरोपी गंभीर सिंह के पास से उसकी भाभी के जेवरात और पासबुक आदि भी मिली। पुलिस की जांच में दोनों भाइयों में एक बीघा जमीन के बंटवारे का विवाद सामने आया।
गंभीर सिंह अपनी मां की हत्या में भी नामजद था और जेल में बंद था। इस दौरान उसकी जमीन सत्यभान ने अपनी पत्नी पुष्पा के नाम से खरीद ली थी। जमानत पर छूटने के बाद गंभीर ने जमीन वापस मांगी, जिसे लेकर विवाद हुआ।
अदालत में मुकदमे के विचारण के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयान से यह निर्विवाद रूप से साबित हो गया कि गंभीर ने भी अपने भाई के पूरे परिवार को बड़ी निर्ममता से मौत के घाट उतारा था।
अभिषेक के नाबालिग होने के कारण उसकी पत्रावली अलग कर दी गई और गायत्री को ट्रायल कोर्ट ने दोषमुक्त कर दिया है। हाईकोर्ट ने इस फैसले को सही करार दिया है।