साइबर क्रिमिनल्स बैंक अधिकारी बनकर लोगों को लाखों का चूना लगा रहे हैं। फोन पर खाते और एटीएम कार्ड से संबंधित जानकारी लेकर रकम निकाल लेते हैं। गत छह महीने में कई लोगों को शिकार बना चुके हैं। डीआईजी की साइबर क्राइम यूनिट ने समय पर सूचना मिलने पर पांच लाख से ज्यादा की रकम वापस करा दी है।
साइबर क्राइम यूनिट के मुताबिक, पिछले छह माह के अंदर प्रार्थना पत्र और ईमेल से शिकायत मिल रही थीं। लोगों ने बताया था कि बैंक अधिकारी बनकर उनके पास किसी व्यक्ति ने फोन किया। एटीएम को ब्लॉक करने की बात कहकर 16 डिजिट का नंबर पूछ लिया। दूसरे दिन कॉल करके उसका पासवर्ड पता किया। इसके बाद उनके खाते से रकम निकाल ली गई। जांच में पता चला कि साइबर क्रिमिनल धनराशि का आनलाइन हस्तानांतरण विभिन्न पेमेंट ट्रेडर के माध्यम से रुपयों को ई वॉलेट के एकाउंट में डलवा देते हैं। इसके बाद मोबाइल फोन, डीटीएच को रिचार्ज किया जाता है। ई वालेट से रकम एकाउंट में ट्रांसफर करके भी निकाली जाती है। 14 लोगों की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई की र्गई तो तकरीबन पांच लाख 14 हजार की रकम को वापस कराने में सफलता मिली।
तहसीलदार के खाते से निकाली रकम
पूर्व में तैनात रहे तहसीलदार के खाते से साइबर क्रिमिनल ने क्लोन चेक के माध्यम से 1.45 लाख रुपये की रकम निकाल ली थी। पुलिस ने उक्त धनराशि को वापस करा दिया।
झारखंड की आईडी पर सिम
आनलाइन फ्रॉड करने वाले शातिर पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार में बैठे रहते हैं। जिस सिम से फोन करते हैं उसकी आईडी फर्जी होती है। इस कारण उन्हें पकड़ना आसान नहीं होता है।
इन बातों का रखें ध्यान
- बैंक अधिकारी खातों और एटीएम की जानकारी फोन पर नहीं लेते हैं।
- एटीएम कार्ड का पासवर्ड किसी को भी न बताएं, कवर पर न लिखें।
- एटीएम से रुपये निकालते समय किसी अंजान व्यक्ति की सहायता न लें।
- एकांत इलाकों में लगे एटीएम से रकम निकालने से बचें।
- बिल भुगतान के लिए कार्ड अपने सामने ही स्वैप कराएं।