आगरा के फतेहपुर सीकरी के गोठरा गांव में 13 नवंबर 1995 को की गई रामबाबू की हत्या के मामले में मंगलवार को अदालत का फैसला आया। अपर जिला जज विवेक संगल ने तीन आरोपियों को दोष सिद्ध पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। उन पर 54 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया गया।
घटना के पीछे रंजिश थी। 13 नवंबर की सुबह छह बजे रामबाबू, उनका भाई ब्रजवासी, भाभी रामरती, भतीजा राम निवास खेत से आ रहे थे। ये लोग पानी लगाने के लिए गए थे। घटना की रिपोर्ट ब्रजवासी ने दर्ज कराई। इसमें चंद्रभान, उसके भाई राजवीर और राजन सिंह को नामजद कराया गया। आरोप था कि तीनों घात लगाए बैठे थे। जैसे ही रामबाबू और उसके परिजन आए, उन पर हमला बोल दिया गया। लाठी, डंडो, फरसों से प्रहार किए गए, तमंचे और बंदूकों से गोली चलाई गई।
रामबाबू को घसीटते हुए मोहन सिंह की झोंपड़ी में ले जाया गया और झोंपड़ी में आग लगा दी गई। गोलियों की आवाज, आग और धुएं के कारण कोई बचाने के लिए आगे नहीं आ सका। आरोपी फायरिंग कर भाग निकले। एडीजीसी महेश पाठक ने गवाह और सुबूत पेश किए। घटना की रिपोर्ट ब्रजवासी ने दर्ज कराई थी। इसमें और भी लोग नामजद कराए गए थे लेकिन पुलिस ने जांच में उनका नाम निकाल दिया था। तीन लोगों के खिलाफ केस चला। गवाहों के बयान और साक्ष्यों के आधार पर तीनों हत्या के दोषी पाए गए।