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महिला चिकित्सालय में फिर लापरवाही, नवजात की मौत

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एटा। महिला जिला अस्पताल में शुक्रवार को एक बार फिर लापरवाही सामने आई है। यहां प्रसव के बाद नवजात की गिरने से मौत हो गई। परिजन स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से बच्चे की मौत होने का आरोप लगा रहे हैं।
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विकास खंड शीतलपुर के गांव ककरावली निवासी फूलेंद्र सिंह की पत्नी रूबी आठ माह की गर्भवती थी। गुरुवार शाम प्रसव पीड़ा होने पर परिजन महिला को शुक्रवार सुबह पांच बजे महिला जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। रूबी की मां रामादेवी का आरोप है कि स्वास्थ्य कर्मियों ने बिना देखे ही कह दिया कि अभी बच्चा नहीं होगा और प्रसूता को घर ले जाओ। ज्यादा गुहार लगाने पर दवा लिख दी और कहा कि दवा खिलाकर घर ले जाइए। महिला को दवा खिलाकर वे रूबी को जिला अस्पताल की इमरजेंसी लेकर पहुंचे तो और उसे तेज दर्द होने लगे। इसके बाद परिजन प्रसूता को दोबारा महिला अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन फिर भी अस्पताल में तैनात कर्मियों का रवैया नहीं बदला। महिला को एक बेड पर लिटा दिया लेकिन कोई देखने वाला नहीं था। दर्द से परेशान महिला तड़प रही थी और इधर-उधर चक्कर काट रही थी। इसके बावजूद भी स्वास्थ्य कर्मियों ने कोई हमदर्दी नहीं दिखाई। प्रसूता को लगा कि उसका बच्चा बाहर आ गया है तो वह स्टोर की ओर भागी, तभी खड़े से ही बच्चा बाहर आ गया सिर जमीन में जाकर लगा। इसके बाद स्वास्थ्य कर्मचारियों ने बच्चे को उठाया लेकिन इससे पहले ही उसकी मौत हो गई। इसके बाद प्रसूता के परिजनों में रोष फैल गया। पीड़ित महिला के परिजनों का आरोप है यदि डाक्टर और स्टाफ नर्स लापरवाही नहीं बरते तो बच्चे की जान बच सकती थी। प्रसूता रूबी की ठीक से देखभाल नहीं किए जाने से बच्चे की जान चली गई।
सात महीने का होने से नहीं बचा बच्चा
स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि डिलीवरी रूम में तीन बेड हैं। सभी बेडों पर मरीज पहले से मौजूद थे। ऐसे में प्रसूता रूबी को बाहर रोक कर रखा गया था। महिला को जैसे ही बच्चा हुआ तो कर्मचारियों की ओर से पूरा सहयोग किया गया। बच्चा कमजोर था और 1.385 किग्रा वजन था। इस कारण उसकी मौत हो गई।
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महिला को प्रसव पीड़ा बढ़ने पर स्टाफ नर्स अंजू ने मौजूद डा. निधि गुप्ता को जानकारी नहीं दी। इस कारण महिला ने बाहर ही बच्चे को जन्म दिया। मामले की जांच की ला रही है। स्टाफ नर्स को दोषी पाया गया है उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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प्रदीप कुमार, सीएमएस
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