कोरोना काल के दौरान बांटे गए अपात्र आवासीय पट्टों पर प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए 14 पट्टे निरस्त कर दिए। जांच में बड़े पैमाने पर धांधली सामने आई, केवल एक पात्र आवंटी का पट्टा बरकरार रखा गया है।
आगरा के थाना बसई अरेला क्षेत्र के ग्राम महापुर में कोरोना काल के दौरान रेवड़ियों की तरह अपात्रों को बांटे गए आवासीय पट्टों पर प्रशासन का हंटर चला है। एडीएम वित्त ने जांच में दोषी पाए जाने पर एडीएम न्यायिक धीरेंद्र ने 14 अपात्रों के पट्टे तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए हैं। इस कार्रवाई से भू-माफिया और नियमों की अनदेखी करने वालों में अफरा-तफरी मच गई है।
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जांच में खुलासा हुआ कि जब पूरा देश 23 मार्च 2020 को लॉकडाउन की आहट से सहमा था, तब महापुर की भूमि प्रबंधक समिति ने आनन-फानन में प्रस्ताव पारित कर दिया। हैरानी की बात यह है कि बिना किसी स्थलीय सत्यापन के अगले ही दिन यानी 24 मार्च को एसडीएम स्तर से इन पट्टों को स्वीकृति भी मिल गई। जिसके बाद शिकायत पर एडीएम वित्त ने मामले की जांच की। एडीएम न्यायिक ने सुनवाई के बाद 14 पट्टे निरस्त कर दिए हैं।
एडीएम की जांच में खुलीं ये परतें
जिस जमीन का आवंटन किया गया, वह राजस्व अभिलेखों में सार्वजनिक आबादी और ‘आम रास्ते’ के रूप में दर्ज थी। यह भूमि ग्राम पंचायत के प्रबंधन क्षेत्र से बाहर थी। कुल 17 आवंटियों में से अधिकांश के पास पहले से ही आलीशान पुश्तैनी मकान, कृषि भूमि और पर्याप्त संसाधन थे। पात्रता की शर्तों को पूरी तरह दरकिनार किया गया। आरसी प्रपत्र-16 में बड़े पैमाने पर काट-छांट और तकनीकी खामियां पाई गईं, जो स्पष्ट धांधली की ओर इशारा करती हैं।
केवल एक पट्टा रहा बरकरार
मंडलायुक्त के निर्देश पर हुई इस विस्तृत जांच के बाद, न्यायालय ने केवल अर्जुन सिंह पुत्र रामसनेही (अनुसूचित जाति) को ही पात्र माना और उनका आवंटन बरकरार रखा। शेष सभी 14 पट्टों को अवैध घोषित कर निरस्त कर दिया गया।
एक सप्ताह में कब्जा लेने का आदेश
एडीएम कोर्ट ने आदेश की प्रति उपजिलाधिकारी बाह को भेजते हुए निर्देशित किया है कि आवंटित भूमि को अविलंब ग्राम सभा के कब्जे में लिया जाए। साथ ही राजस्व अभिलेखों (खतौनी) में अमलदामद कराकर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।